आगरा ।
एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम ) ने एक हत्या के मामले में जांच अधिकारी (विवेचक) द्वारा लगाई गई फाइनल रिपोर्ट (एफ़ .आर .) को खारिज कर दिया है।
सीजेएम ने पुलिस आयुक्त को इस मामले की आगे की जांच किसी अन्य सक्षम अधिकारी से कराने का आदेश दिया है।
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क्या था मामला ?
यह मामला जगदीशपुरा थाना क्षेत्र के गड्डे वाली बस्ती, भीम नगर के किशन लाल से जुड़ा है। किशन लाल ने अपने बेटे श्यामू की हत्या के आरोप में भव्या उर्फ सोनू, सुंदर, रोहित और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
वादी किशन लाल ने आरोप लगाया था कि आरोपी उनके बेटे को घर से अपने साथ ले गए, उसके साथ मारपीट की और उसे जहर मिली शराब पिलाकर मार डाला। इसके बाद, उन्होंने श्यामू की लाश को गली में फेंक दिया।
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अदालत का फैसला:
जांच अधिकारी ने इस हत्या के मामले में एफ .आर . लगाकर इसे अदालत में भेज दिया था, जिसका अर्थ था कि उन्हें जांच में कोई ठोस सबूत नहीं मिला।
हालांकि, वादी किशन लाल ने अपने वकील अनिल अग्रवाल के माध्यम से इस पर आपत्ति जताई।
अदालत ने वादी की आपत्ति को स्वीकार करते हुए जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत एफ .आर . को खारिज कर दिया।
सीजेएम ने पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि इस केस की गहन और दोबारा जांच किसी योग्य अधिकारी से कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके।
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