मारपीट कर घातक चोट पहुंचाने के मामले में दोषी को जेल नहीं, छह माह की परिवीक्षा पर रिहा

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा।

अपर जिला जज (चतुर्थ) माननीय पवन कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने मारपीट कर गंभीर चोट पहुंचाने के एक मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है।

हालांकि, न्यायालय ने दोषी को जेल की सजा से दंडित करने के बजाय उसे छह माह की परिवीक्षा (नेक चाल-चलन) पर रिहा करने के आदेश पारित किए हैं।

घटना का विवरण:

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 13 नवंबर 2022 की रात करीब 8:30 बजे की है। थाना हरीपर्वत क्षेत्र के अंतर्गत टीपी नगर स्थित शराब के ठेके के समीप वादी आकाश के मित्र सलमान के साथ विवाद हुआ था।

आरोप था कि ओमकार (पुत्र केशव देव, निवासी शास्त्री नगर, खंदारी, थाना हरीपर्वत) और अन्य लोगों ने लाठी-डंडों से सलमान को पीटा और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस घटना के संबंध में थाना हरीपर्वत पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र अदालत में पेश किया था।

गवाह और साक्ष्य:

न्यायालय के समक्ष अभियोजन पक्ष ने अपने केस को साबित करने के लिए अहम गवाहों को पेश किया।

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इनमें वादी मुकदमा आकाश, घायल सलमान, उपनिरीक्षक रविंद्र सिंह, डॉ. प्रभात सिंह और पुलिसकर्मी गौरव कुमार शामिल थे, जिन्होंने अदालत में उपस्थित होकर अपनी गवाही दी।

अदालत का फैसला और रिहाई की शर्तें:

एडीजे 4 माननीय पवन कुमार श्रीवास्तव ने गवाहों के बयानों और घायल सलमान की मेडिकल रिपोर्ट का गहनता से अवलोकन किया।

साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी ओमकार को दोषी पाया, लेकिन उसे जेल की सजा देने के बजाय सुधरने का एक अवसर प्रदान किया।

अदालत ने 25-25 हजार रुपये की दो जमानतें और समान राशि का व्यक्तिगत मुचलका प्रस्तुत करने पर उसे छह माह की परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया।

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न्यायालय ने रिहाई के साथ कुछ सख्त शर्तें भी लगाई हैं:

* इस छह माह की अवधि के दौरान दोषी पूरी तरह से शांति बनाए रखेगा।

* वह किसी भी अन्य आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा।

* दोषी मद्यपान (शराब का सेवन) नहीं करेगा और समाज में सदाचार बनाए रखेगा।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि दोषी द्वारा परिवीक्षा की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया जाता है, तो उसे सजा तय करने के बिंदु पर सुनवाई के लिए तत्काल अदालत में हाजिर होना पड़ेगा।

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विवेक कुमार जैन
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