अदालत नें पुलिस एवं औषधि निरीक्षक के विरुद्ध की तीखी टिप्पणी
आरोपी से बरामद माल भी अदालत में नही किया पेश
14 बोरे दवा बरामद की, औषधियों का ब्यौरा नही दिया
बरामदगी का कोई स्वतंत्र गवाह नही पेश किया, ना ही विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट ही की पेश
इस मामले में पुलिस को विवेचना करने का नहीं था कोई अधिकार
आगरा १ मई ।
ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट(औषधि एवं प्रसाधन सामिग्री अधिनियम)एवं धोखाधड़ी के आरोप में आरोपित मनोज पुत्र स्व.लज्जाराम निवासी कैलाश नगर बल्केश्वर, थाना न्यू आगरा को ओषधि निरीक्षक एवं पुलिस की लापरवाही पर उनके विरुद्ध तीखी टिप्पणी कर विशेष न्यायाधीश ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट माननीय मृदुल दुबे ने बरी करने के आदेश दिये।
थाना कोतवाली में दर्ज मामले के अनुसार औषधि निरीक्षक जगवीर सिंह, औषधि निरीक्षक लखनऊ जीसी श्रीवास्तव, औषधि निरीक्षक इटावा जीडी गौड़, सहायक औषधि नियंत्रक आगरा मंडल पीपी सिंह ने 24 अगस्त 2009 को आरोपी मनोज प्रोप्राइटर मैसर्स हर्ष मैडिकल स्टोर बोहरे राम गोपाल मार्किट फब्बारा आगरा द्वारा भवन मालिक हिसामुद्दीन से किराये पर लिये सुई कटरा स्थित दो गोदामों पर छापा मार 9 बोरे सैंपल की दवा के साथ अन्य दवा बरामद की थी ।
उक्त गोदाम का कोई विक्रय लायसेंस भी नहीं लिया गया था । औषधि निरीक्षक जगवीर सिंह ने उक्त मामले की तहरीर थाना कोतवाली में दे आरोपी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था ।
अभियोजन पक्ष की तरफ से वादी मुकदमा औषधि निरीक्षक जगवीर सिंह, एस आई जय शिव भारती, निरीक्षक देवेंद्र सिंह, पुलिस कर्मी बनी सिंह को बतौर गवाह अदालत मे पेश किया गया ।
विशेष न्यायाधीश ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट माननीय मृदुल दुबे ने आरोपी के अधिवक्ता प्रदीप राठौर के तर्क पर आदेश में तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस को किंचित यह ज्ञान भी नहीं है कि ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट कें तहत ड्रग इंस्पेक्टर अदालत में परिवाद दाखिल कर सकता है।
यदि उक्त एक्ट के तहत कोई व्यक्ति एफआईआर भी करता है तो भी उसकी विवेचना ड्रग एंड कॉस्मेटिक के अफसर द्वारा ही की जा सकती हैं ना कि पुलिस द्वारा।पुलिस द्वारा बिना क्षेत्राधिकार के विवेचना पूर्ण कर आरोप पत्र अदालत में पेश करना किसी भी सूरत में विधि संगत नहीँ है।
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अभियोजन ने ना तो बरामदगी का कोई स्वतंत्र गवाह पेश किया ना ही बरामद दवाओं को अदालत में पेश किया।ना ही बरामद दवाओं का ब्यौरा अदालत में पेश किया ।
आरोपी ने जिस हिसामुद्दीन नामक व्यक्ति से किराये पर गोदाम लिया उसको भी गवाही हेतु पेश नहीं किया गया। अदालत नें साक्ष्य के अभाव में आरोपी को बरी करने के आदेश दिये।
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