आगरा ।
जिला जज की अदालत ने दहेज उत्पीड़न और दहेज हत्या के एक मामले में साक्ष्य के अभाव में आरोपी पति को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया है।
सुनवाई के दौरान मृतका के पिता, माता, दादी और चाचा अपने ही बयानों से मुकर गए। अदालत ने गवाही से पलटने की इस कार्रवाई को गंभीरता से लेते हुए वादी (मृतका के पिता) के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि:
थाना न्यू आगरा में दर्ज मुकदमे के अनुसार, वादी भूरी सिंह (निवासी शिव नगर, दयालबाग) ने अपनी शिकायत में बताया था कि उनकी पुत्री सलोनी का विवाह 7 मई 2021 को गणेश (निवासी राजेंद्र पार्क, सूरत नगर, फेस 2, गुरुग्राम, हरियाणा) के साथ हुआ था।
वादी का आरोप था कि शादी में सामर्थ्य से अधिक खर्च करने के बावजूद ससुराल वाले संतुष्ट नहीं थे और अतिरिक्त दहेज के रूप में वैगनआर कार की मांग करते हुए सलोनी को प्रताड़ित करते थे।
विवाद बढ़ने पर सलोनी को ससुराल से निकाल दिया गया, जिसके बाद वह अपने मायके में रहने लगी।
इसी बीच 23 मार्च 2023 को सलोनी ने मायके में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
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पुलिस विवेचना:
वादी भूरी सिंह ने अपनी पुत्री के पति गणेश, ससुर जय सिंह, सास शीला देवी, जेठ सुरजीत, जेठानी सीमा, ननद पूनम और देवर शिवा के विरुद्ध दहेज उत्पीड़न तथा दहेज हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज कराया था।
हालांकि, पुलिस की विवेचना में पति गणेश को छोड़कर अन्य सभी परिजनों की नामजदगी गलत पाई गई। इसके आधार पर पुलिस ने केवल पति गणेश के खिलाफ ही अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था।
अदालत का फैसला और वादी पर कार्रवाई:
मुकदमे के विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष को बड़ा झटका लगा। मुख्य गवाह, जिनमें मृतका के पिता भूरी सिंह, माता मानसी देवी, दादी राजवती और चाचा शिव गणेश शामिल थे, अदालत में अपनी पूर्व गवाही से मुकर गए।
आरोपी पति की ओर से अदालत में अधिवक्ता जैकी सिंह ने पैरवी की। उन्होंने साक्ष्य के अभाव और गवाहों के अपने बयानों से पलट जाने का तर्क प्रस्तुत किया।
जिला जज ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता के तर्कों से सहमति जताते हुए और साक्ष्यों के अभाव में आरोपी पति गणेश को बरी करने के आदेश दिए।
इसके अतिरिक्त, अदालत ने न्याय प्रक्रिया में गवाही से मुकरने के कारण वादी भूरी सिंह के विरुद्ध विधिक कार्रवाई के सख्त आदेश भी पारित किए हैं।
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