आगरा/प्रयागराज: ३ जुलाई ।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UP PSC) द्वारा आयोजित यूपी पीसीएस -जे 2022 मुख्य परीक्षा में 50 से अधिक अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में कथित छेड़छाड़ और अंकों में बदलाव से जुड़े गंभीर मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में कल (4 जुलाई 2025) सुनवाई होगी।
यह सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ द्वारा की जाएगी।
यह मामला याचिकाकर्ता श्रवण पांडेय की याचिका से सामने आया है, जिन्होंने हाईकोर्ट में अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए यूपी पीसीएस-जे 2022 मुख्य परीक्षा को चुनौती दी है। श्रवण पांडेय की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए लोक सेवा आयोग ने स्वत संज्ञान लिया और उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराया।
इस पुनर्मूल्यांकन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिसमें 50 से अधिक कॉपियों के साथ छेड़छाड़ की पुष्टि हुई। इसके बाद कई अन्य अभ्यर्थियों ने भी इसी प्रकार की शिकायतें करते हुए हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हैं।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 20 दिसंबर 2024 को अनियमितताओं की जांच के लिए एक स्वतंत्र आयोग का गठन किया था। कोर्ट ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर को इस स्वतंत्र आयोग का नेतृत्व करने के लिए नियुक्त किया था और आयोग से 31 मई 2025 तक अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का अनुरोध किया था।
इससे पहले, 6 दिसंबर 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचियों की मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं भी तलब की थीं। कोर्ट ने इन उत्तर पुस्तिकाओं को सीलबंद लिफाफे में न्यायालय में दाखिल करने का निर्देश दिया था।
साथ ही, अदालत ने यह भी आदेश दिया था कि याचिकाकर्ताओं को प्राप्त अंक 7 दिसंबर 2024 तक आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किए जाएं। इस महत्वपूर्ण मामले पर कल होने वाली सुनवाई में अदालत आगे क्या निर्देश देती है, यह देखना अहम होगा।
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