आगरा /प्रयागराज:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा के कुख्यात स्क्रैप माफिया रवि काना उर्फ रवि नागर को बिना न्यायिक आदेश के जेल से रिहा करने के मामले में बड़ी राहत दी है।
कोर्ट ने बांदा जेल के निलंबित अधीक्षक अनिल कुमार गौतम और जेलर विक्रम सिंह यादव की गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक अंतरिम रोक लगा दी है।
मामले की मुख्य बिंदु:
न्यायालय का आदेश:
जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस सत्य वीर सिंह की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
सरकार से जवाब तलब:
कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य प्रतिवादियों को 6 सप्ताह के भीतर अपना जवाब (Counter Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है।
इसके बाद याचिकाकर्ताओं को भी 2 सप्ताह में अपना प्रत्युत्तर (Rejoinder) दाखिल करना होगा।

अगली सुनवाई:
इस प्रकरण की अगली सुनवाई 27 मई 2026को निर्धारित की गई है।
क्या है पूरा विवाद ?
मामला 29 जनवरी 2026 का है, जब गैंगस्टर एक्ट के तहत बांदा जेल में बंद स्क्रैप माफिया रवि काना को कथित तौर पर किसी सक्षम न्यायालय के आदेश के बिना ही जेल से रिहा कर दिया गया था।
एफआईआर और कार्रवाई:
1. जेल से अवैध रिहाई की सूचना मिलने पर प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया था।
2. 2 फरवरी को जेल चौकी इंचार्ज अनुराग पांडे ने कोतवाली नगर थाने में जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम, जेलर विक्रम सिंह यादव और अन्य संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर (FIR)दर्ज कराई थी।
3. शासन स्तर पर कार्रवाई करते हुए दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।
महत्वपूर्ण नोट:
हाईकोर्ट के इस आदेश से फिलहाल दोनों अधिकारियों को पुलिसिया कार्रवाई और गिरफ्तारी से सुरक्षा मिल गई है, हालांकि मामले की जांच और विधिक प्रक्रिया जारी रहेगी।
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