आगरा।
अपर जिला जज (एडीजे) 15 माननीय राजीव कुमार पालीवाल की अदालत ने 17 वर्ष पुराने खेरागढ़ थाने में पुलिसकर्मियों पर पथराव, आगजनी और बलवा करने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
अदालत ने खेरागढ़ के पूर्व चेयरमैन अनिल कुमार गर्ग उर्फ अन्नी और उनके भाई सहित 16 दोषियों को सात वर्ष की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, साक्ष्य के अभाव में 21 आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया गया है।
घटना की पृष्ठभूमि:
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 23 मार्च 2008 को होली की द्वितीया पर खेरागढ़ में मेले और जुलूस का आयोजन हो रहा था।
इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए तत्कालीन थानाध्यक्ष (बसई जगनेर) विक्रम सिंह तोमर पुलिस बल के साथ तैनात थे।
दोपहर में जुलूस पूर्व चेयरमैन अनिल कुमार गर्ग की ट्रैक्टर एजेंसी के सामने से गुजरा, जहां कुछ लड़कों के झगड़ा करने की सूचना पर पुलिस उन्हें पकड़कर थाना खेरागढ़ ले आई।
इसके बाद पूर्व चेयरमैन अनिल कुमार गर्ग 59 नामजद और लगभग 250-300 अज्ञात लोगों की भीड़ के साथ थाने पहुंच गए और पकड़े गए लड़कों से मारपीट शुरू कर दी।
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जब पुलिस ने उन्हें रोका, तो भीड़ हिंसक हो गई। पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी दी गई।
हथियारों से लैस भीड़ ने पुलिस पर फायरिंग की, थाने में पथराव किया और बैरक के दो कमरों, तीन सरकारी जीप, एक जिप्सी, तीन मोटरसाइकिल और वायरलेस सेट को आग के हवाले कर दिया।
बाद में अन्य थानों की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर 29 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इस मामले में विक्रम सिंह तोमर की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था।
अदालत का फैसला और सजा:
गवाहों के बयानों और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रूपेंद्र गोस्वामी की दलीलों को सुनने के बाद एडीजे 15 माननीय राजीव कुमार पालीवाल ने 16 आरोपियों को दोषी ठहराया।
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सजा पाने वाले दोषियों में पूर्व चेयरमैन अनिल कुमार गर्ग उर्फ अन्नी, उनका भाई राम अवतार गर्ग उर्फ टीटू, शकील, लियाकत, गया प्रसाद, संजीव कुमार, देश राज, हरीश चंद, प्रवीन कुमार, परमाल, राजेश, राजवीर, राकेश, गुड्डू और बनवारी लाल शामिल हैं।
अदालत ने इन्हें भादंसं की धारा 148, 332, 336, 353, 427, 436, 506 और लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धारा 4 के तहत दोषी पाते हुए अधिकतम 7 वर्ष की कैद और अलग-अलग अर्थदंड से दंडित किया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
एक अन्य दोषी करुआ उर्फ रामेंद्र सजा सुनाए जाने के दौरान अदालत में उपस्थित नहीं था, जिसके चलते अदालत ने उसके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्यवाही करने के आदेश दिए हैं।
साक्ष्य के अभाव में 21 आरोपी बरी:
अदालत ने इस संगीन मामले में 21 आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। बरी होने वालों में मुस्ताक, बबलू पोद्दार, महेश, नरेश, बॉबी, निरंजन अग्रवाल, राजू उर्फ राजकुमार, विष्णु शर्मा, गिरीश चंद गोयल, योगेश उर्फ योगेंद्र शर्मा, आशु, हरीश त्यागी, करुआ, सुरेंद्र लवानिया, विष्णु शर्मा (पुत्र श्री प्रकाश), अब्बू, विनोद अग्रवाल, सिंकी, भुल्लड़ उर्फ मुन्ना लाल, रिंकू और गोपाल शामिल हैं।
फैसला सुनाए जाने के दौरान दीवानी न्यायालय में आरोपियों के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। सजा के ऐलान के बाद सभी दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच जिला कारागार भेज दिया गया।
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