आगरा ।
अदालत द्वारा बार-बार आदेश पारित किए जाने के बावजूद आरोपी को पेश न करने पर आगरा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (13 ) माननीय महेश चंद वर्मा ने कड़ा रुख अपनाया है।
न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक मथुरा और जिला कारागार अधीक्षक मथुरा की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए उन्हें 12 मई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।
प्रकरण और अदालती कार्यवाही:
यह मामला थाना अछनेरा से संबंधित आयुध अधिनियम और अन्य धाराओं के अंतर्गत सरकार बनाम रनवीर आदि के मुकदमे से जुड़ा है।
इस मामले का एक आरोपी रामजीत वर्तमान में जिला कारागार मथुरा में निरुद्ध है। न्यायालय ने सबसे पहले 9 मार्च 2026 को आरोपी को अदालत में पेश करने के आदेश दिए थे।
जब 23 मार्च 2026 को आरोपी को पेश नहीं किया गया, तो न्यायालय ने दोबारा 8 अप्रैल 2026 को आदेश जारी किया।

अवमानना की चेतावनी और व्यक्तिगत उपस्थिति:
न्यायालय ने पाया कि बार-बार आदेश जारी होने के बाद भी न तो पुलिस अधीक्षक और न ही जेल अधीक्षक मथुरा द्वारा इनका अनुपालन किया गया।
एडीजे माननीय महेश चंद वर्मा ने इसे न्यायिक कार्य में जानबूझकर बाधा डालने के रूप में देखा है।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि दोनों अधिकारी 12 मई को स्वयं हाजिर होकर बताएं कि उनके विरुद्ध आपराधिक अवमानना की कार्यवाही हेतु मामला उच्च न्यायालय को क्यों न संदर्भित कर दिया जाए।
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आगामी सुनवाई के निर्देश:
न्यायालय ने अपने कड़े आदेश में यह भी निर्देशित किया है कि स्पष्टीकरण के साथ-साथ जिला कारागार मथुरा में बंद आरोपी रामजीत को भी 12 मई को अनिवार्य रूप से अदालत में हाजिर कराया जाए।
न्यायालय के इस रुख से प्रशासनिक और जेल अधिकारियों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इसे सीधे तौर पर न्यायिक आदेश की अवहेलना और कर्तव्य के प्रति लापरवाही माना गया है।
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