आगरा/जयपुर: १२ अगस्त ।
राजस्थान हाई कोर्ट ने जयपुर, जोधपुर और उदयपुर के नगर निकायों को शहर की सड़कों से आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों को हटाने के लिए एक विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। यह आदेश जस्टिस कुलदीप माथुर और जस्टिस रवि चिरानिया की पीठ ने दिया।
न्यायालय ने यह फैसला कुत्तों के काटने और सड़कों पर जानवरों से होने वाले हादसों की बढ़ती घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेते हुए लिया है। पीठ ने कहा कि अधिकारी इस अभियान के दौरान जानवरों को कम से कम नुकसान पहुंचाना सुनिश्चित करें।
साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि जो लोग इस अभियान में बाधा डालने की कोशिश करते हैं, उनके खिलाफ अधिकारी आपराधिक मामला दर्ज करने सहित सख्त कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करने का निर्देश:
कोर्ट ने नगर निगमों से एक टेलीफोन/मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी जारी करने को भी कहा है, ताकि नागरिक आवारा जानवरों से जुड़ी अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें। यह कदम जन सुरक्षा सुनिश्चित करने और शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए उठाया गया है।
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जानवरों को खिलाने-पिलाने पर भी निर्देश
अदालत ने उन लोगों को भी संबोधित किया जो धार्मिक भावनाओं या जानवरों के प्रति प्रेम के कारण उन्हें भोजन देते हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति जानवरों को खाना खिलाना चाहता है, तो उसे नगर पालिकाओं या निजी संस्थाओं द्वारा संचालित आश्रय स्थलों (शेल्टर होम) और गौशालाओं में ही ऐसा करना चाहिए। यह कदम सड़कों पर जानवरों के इकट्ठा होने को रोकने और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए उठाया गया है।

राजमार्गों पर गश्त का आदेश:
इसके अलावा, राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग प्राधिकरणों को भी सड़कों से आवारा जानवरों को हटाने और यातायात की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए नियमित गश्त करने का निर्देश दिया गया है।
इस मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी, जब कोर्ट राज्य सरकार और नगर निकायों की कार्रवाई पर विचार करेगा।
इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन आचार्य, प्रियंका बोराणा और हेली पाठक न्यायमित्र (ऐमिकस क्यूरिए ) के रूप में कोर्ट की सहायता कर रहे हैं।
Attachment/Order/Judgement – Suo_Motu_Stray_Dogs
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