आगरा ।
साइबर क्राइम से जुड़े धोखाधड़ी के एक मामले में आगरा न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। राजपुर चुंगी स्थित एसबीआई एटीएम पर एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी का एटीएम कार्ड बदलकर उनके खाते से 16 लाख 56 हजार रुपये निकालने के आरोपी वैभव गोयल की जमानत याचिका को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) माननीय पुष्कर उपाध्याय ने खारिज कर दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि:
घटना 13 अक्टूबर 2025 की है, जब पीड़ित सेवानिवृत्त शासकीय अधिकारी मोहम्मद आसिफ खान राजपुर चुंगी स्थित भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम से नकदी निकालने गए थे।
दो बार प्रयास करने के बाद भी जब पैसे नहीं निकले, तो वहां मौजूद दो युवकों ने उन्हें अपनी बातों में उलझा लिया।
इसी दौरान आरोपियों ने बड़ी चालाकी से पीड़ित का एटीएम कार्ड बदल दिया और बाद में उनके खाते से कुल 16 लाख 56 हजार रुपये पार कर दिए।
पुलिस कार्रवाई और बरामदगी:
पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की।

पुलिस ने आरोपी वैभव गोयल, जो कि मेरठ के ग्राम अगेड़ा (गंगानगर) का निवासी है, को अन्य साथियों के साथ गिरफ्तार किया।
इनके कब्जे से भारी मात्रा में संदिग्ध सामग्री बरामद हुई, जिसमें शामिल हैं:
* विभिन्न बैंकों के 153 एटीएम कार्ड
* 1 लाख 6 हजार रुपये की नगदी
* 3 मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
न्यायालय का निर्णय:
सुनवाई के दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता आदर्श चौधरी ने आरोपी की जमानत का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपी एक संगठित गिरोह का हिस्सा हैं जो भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बनाते हैं।
अभियोजन के तर्कों और अपराध की गंभीरता को स्वीकार करते हुए न्यायाधीश माननीय पुष्कर उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में रियायत नहीं दी जा सकती।
न्यायालय ने आरोपी वैभव गोयल द्वारा प्रस्तुत जमानत प्रार्थना पत्र को प्रथम दृष्टया गंभीर अपराध मानते हुए निरस्त करने के आदेश जारी किए।
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