आगरा उपभोक्ता आयोग प्रथम का मोटोरोला मोबाइल कंपनी पर जुर्माना, वारंटी में फोन ठीक न करने पर देना होगा मुआवजा

उपभोक्ता मामले न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग- प्रथम, आगरा के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने मोबाइल फोन निर्माता कंपनी मोटोरोला, उसके अधिकृत सर्विस सेंटर और डीलर के खिलाफ उपभोक्ता के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है।

आयोग ने वारंटी अवधि में मोबाइल फोन खराब होने और उसे ठीक करने के एवज में मनमाना शुल्क मांगने को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार संव्यवहार माना है।

मामले का विवरण:

परिवादी हितेन्द्र सिंह, जो वर्तमान में दीवानी न्यायालय आगरा में विशेष सुरक्षा बल में तैनात हैं, ने 24 मई 2025 को रिद्धि मोबाइल प्वाइंट, आगरा से मोटोरोला का मोबाइल फोन (मॉडल MOTO EDGB 60 FUSION) 21,400/- रुपये में खरीदा था।

इस फोन पर निर्माता कंपनी द्वारा एक वर्ष की वारंटी दी गई थी। खरीदने के कुछ दिन बाद ही फोन में खराबी आने लगी। जब परिवादी ने मैसर्स शारदा इन्टरप्राइजेज स्थित सर्विस सेंटर पर फोन दिखाया, तो उनसे जांच के लिए 236 रुपये लिए गए और फोन सही करने के लिए 22,331/- रुपये का एस्टीमेट थमा दिया गया।

20 अगस्त 2025 को फोन पूरी तरह बंद हो गया। वारंटी होने के बावजूद सर्विस सेंटर ने फोन मुफ्त में ठीक करने से मना कर दिया।

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उपभोक्ता आयोग का निर्णय:

आयोग ने पाया कि 21,400/- रुपये के मोबाइल को वारंटी में ठीक करने के लिए 22,331/- रुपये की मांग करना पूरी तरह से अवैध और वारंटी शर्तों के खिलाफ है।

प्रतिपक्षीगण की ओर से नोटिस मिलने के बावजूद कोई उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद आयोग ने 20 जनवरी 2026 को एकपक्षीय सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया।

आदेश के मुख्य बिंदु:

* प्रतिपक्षीगण (मोटोरोला मोबीलिटी इण्डिया, शारदा इन्टरप्राइजेज और रिद्धि मोबाइल प्वाइंट) को आदेशित किया गया है कि वे संयुक्त और पृथक रूप से मोबाइल का मूल्य 21,400/- रुपये वापस करें।

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* इस राशि पर फोन खरीदने की तारीख 24 मई 2025 से भुगतान की वास्तविक तिथि तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।

* परिवादी को मानसिक पीड़ा और क्षतिपूर्ति के रूप में 10,000/- रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 5,000/- रुपये का अलग से भुगतान करना होगा।

* यह सारी धनराशि निर्णय की तिथि (30 जून 2026) से 45 दिन के भीतर आयोग के खाते में डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करनी होगी।

* यदि 45 दिन के भीतर भुगतान करने में चूक होती है, तो परिवादी को 6 प्रतिशत के स्थान पर 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज प्राप्त करने का अधिकार होगा।

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विवेक कुमार जैन
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