लूट और अन्य आरोपों में आरोपी को मिली जमानत, 15 दिन की देरी से एफआईआर दर्ज कराना बना आधार

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आगरा।

लूट और अन्य धाराओं में आरोपित संजीव उर्फ संजू को विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) माननीय विकास गोयल की अदालत से बड़ी राहत मिली है।

अदालत ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने में हुई 15 दिन की देरी और बरामदगी के समय किसी स्वतंत्र गवाह के न होने को मुख्य आधार मानते हुए आरोपी का जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार कर रिहाई के आदेश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला ?

थाना खंदौली में दर्ज मुकदमे के अनुसार, वादी अमित सिसोदिया ने आरोप लगाया था कि 5 जून 2026 की देर रात वह रामबाग से ऑटो में बैठकर अपने घर सादाबाद जा रहा था। उस ऑटो में चालक सहित पहले से ही चार लोग बैठे हुए थे।

उजरई के पास पहुंचने पर ऑटो सवारों ने वादी के साथ लूटपाट की। उन्होंने वादी से 57,520/- रुपये, एक मोबाइल फोन, नेक बैंड और पावर बैंक लूट लिया और उसे धक्का देकर ऑटो से नीचे उतार दिया।

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15 दिन बाद दर्ज हुई थी एफआईआर:

घटना के 15 दिन बाद 19 जून 2026 को जब वादी किसी काम के सिलसिले में आगरा आया, तो उसने संबंधित ऑटो की पहचान कर ली।

इसके बाद ही वादी ने थाने पहुंचकर इस मामले में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी संजीव उर्फ संजू (पुत्र राजेंद्र, निवासी माता वाली गली, टेढ़ी बगिया, थाना ट्रांस यमुना, जिला आगरा) को गिरफ्तार कर लिया था।

बचाव पक्ष की दलीलें और अदालत का फैसला:

अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता विमल पाल सिंह बघेल, आकाश कुशवाह और पवन बघेल ने मजबूती से अपना पक्ष रखा।

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उन्होंने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि:

* घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने में 15 दिन का लंबा विलंब किया गया है, जो मामले को संदिग्ध बनाता है।

* पुलिस द्वारा दिखाई गई बरामदगी के दौरान कोई भी स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था।

विशेष न्यायाधीश माननीय विकास गोयल ने बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की इन दलीलों पर गौर किया।

अदालत ने एफआईआर में देरी और स्वतंत्र गवाह के अभाव को ध्यान में रखते हुए आरोपी संजीव उर्फ संजू की जमानत मंजूर कर ली और उसे रिहा करने का आदेश पारित किया।

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विवेक कुमार जैन
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