आगरा ।
आगरा की फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के अपर जिला जज माननीय यशवंत कुमार सरोज ने युवती के अपहरण, दुराचार और आपराधिक षड्यंत्र के मामले में आरोपी महेश और दीपक को बरी करने का आदेश दिया है।
न्यायालय ने यह फैसला अभियोजन पक्ष द्वारा साक्ष्य प्रस्तुत न कर पाने और गवाहों के बयानों में विरोधाभास होने के आधार पर सुनाया है।
थाना न्यू आगरा में दर्ज मामले के अनुसार, वादिनी ने आरोप लगाया था कि 22 फरवरी 2010 की शाम वह पानी भरने के लिए स्कूल के पास गई थी।
वहां मारुति वैन के साथ मौजूद राकेश, दीपक और अन्य लोगों ने उसे जबरन वैन में खींच लिया और कुछ सुंघाकर बेहोश कर दिया। वादिनी का आरोप था कि आरोपी उसे दिल्ली ले गए जहां उसके साथ दुराचार किया गया।
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इसके बाद आरोपी उसे धौलपुर ले गए और घटना के कई दिनों बाद सुल्तानगंज की पुलिया पर छोड़कर फरार हो गए।
विचारण के दौरान न्यायालय में पीड़िता, उसकी मां, भाई, चिकित्सक और विवेचक सहित कुल आठ गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
मामले में मुख्य आरोपी राकेश के निरंतर गैर-हाजिर रहने के कारण अदालत ने उसकी पत्रावली को अलग कर दिया था। शेष आरोपियों के विरुद्ध सुनवाई जारी रही।
सुनवाई के समय बचाव पक्ष के अधिवक्ता नीरज पाठक ने तर्क दिया कि पीड़िता के बयानों में गंभीर विरोधाभास है।
इसके अतिरिक्त, पीड़िता की मां और भाई ने भी गवाही के दौरान घटना का समर्थन नहीं किया।
अदालत ने इन तथ्यों और साक्ष्यों की कमी को देखते हुए महेश और दीपक को दोषमुक्त घोषित कर दिया।
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