आगरा के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए होंडा मोटर्स और उसके डीलर को सेवा में कमी का दोषी माना है।
यह मामला वर्ष 2019 का है जब परिवादी अमित कुमार ने नुनिहाई निवासी राजू सिंह के माध्यम से एक एक्टिवा 4जी स्कूटर खरीदा था।
वाहन खरीदने के दो साल के भीतर ही उसका पिछला टायर फूलकर खराब हो गया था।
परिवादी के अनुसार वाहन पर 24 महीने या 24,000 किलोमीटर की वारंटी दी गई थी। जब उन्होंने टायर खराब होने की शिकायत डीलर सत्या मोटर्स से की, तो उन्हें टायर निर्माता कंपनी के पास भेज दिया गया।
वहाँ टायर बदलने से इनकार कर दिया गया और कंपनी की हेल्पलाइन से भी कोई ठोस समाधान नहीं मिला। इसके बाद उपभोक्ता ने आयोग की शरण ली।
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मामले की सुनवाई के दौरान विपक्षी डीलर ने तर्क दिया कि वारंटी केवल इंजन पर होती है, टायर-ट्यूब पर नहीं।
हालांकि आयोग ने साक्ष्यों और कंपनी की अपनी हेल्पलाइन से मिली जानकारी के आधार पर इस तर्क को खारिज कर दिया कि टायर पर भी निर्धारित वारंटी लागू होती है।
आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने अपने फैसले में आदेश दिया कि विपक्षी गण संयुक्त रूप से टायर की कीमत 1,483/- रुपये, परिवाद दाखिल करने की तिथि से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करें।
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इसके अलावा परिवादी को हुई मानसिक पीड़ा के लिए 1,000/- रुपये और वाद व्यय के रूप में 1,000/- रुपये का भुगतान करने का भी निर्देश दिया गया।
इस आदेश के अनुपालन में विपक्षी द्वारा 5,610/- रुपये की कुल धनराशि का चेक राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रस्तुत किया गया, जिसे स्वीकार करते हुए आयोग ने निष्पादन वाद की कार्यवाही समाप्त कर दी है।
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