आगरा।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार संव्यवहार का दोषी मानते हुए परिवादिनी को शेष परिपक्वता धनराशि, ब्याज, मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद-व्यय अदा करने का आदेश पारित किया है।
आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने यह निर्णय श्रीमती अंजलि जैन द्वारा दायर परिवाद संख्या 251/2023 की सुनवाई के उपरांत सुनाया।
मामले के अनुसार, कमलानगर निवासी श्रीमती अंजलि जैन ने 26 सितंबर 2003 को एलआईसी से 5 लाख रुपये की बीमित राशि वाली 20 वर्षीय बीमा पॉलिसी खरीदी थी।
पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक लाभ वापसी हेतु दो विकल्प उपलब्ध थे। पहले विकल्प के तहत हर दो वर्ष पर बीमित राशि का 2 प्रतिशत भुगतान मिलना था, जबकि दूसरे विकल्प में यह राशि परिपक्वता के समय सभी लाभों के साथ जोड़कर देय थी।
पॉलिसी लेते समय परिवादिनी द्वारा भूलवश किसी भी विकल्प पर निशान नहीं लगाया जा सका।
वर्ष 2023 में 20 वर्ष पूरे होने पर जब पॉलिसी परिपक्व हुई, तब एलआईसी ने उन्हें 13,45,620/- रुपये के स्थान पर केवल 12,00,000/- रुपये का ही भुगतान किया।
जब परिवादिनी ने अपने पति की समान पॉलिसी के पूर्ण भुगतान का हवाला देते हुए आपत्ति जताई, तो बीमा कंपनी ने विकल्प न चुनने का तर्क देकर 1,45,620/- रुपये देने से मना कर दिया।

इसके बाद विधिक नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने पर परिवादिनी ने अधिवक्ता गिरीश कुमार गोयल के माध्यम से उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
दोनों पक्षों के तर्कों और साक्ष्यों का परिशीलन करने के उपरांत आयोग ने माना कि यदि परिवादिनी ने किसी विकल्प का चयन नहीं किया था, तो बीमा कंपनी का दायित्व था कि वह प्रथम विकल्प के अनुसार हर दो साल पर राशि प्रदान करती।
कंपनी ने 20 वर्षों तक उस धनराशि का स्वयं उपयोग किया और अंत में शर्तों की आड़ लेकर उपभोक्ता को उसके वैध लाभ से वंचित कर दिया। आयोग ने इसे स्पष्ट रूप से अनुचित व्यापार संव्यवहार और सेवा में घोर कमी करार दिया।
उपभोक्ता आयोग ने अपने अंतिम फैसले में एलआईसी को निर्देश दिया कि वह शेष धनराशि 1,45,620/- रुपये पर 28 सितंबर 2023 से वास्तविक भुगतान की तिथि तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित 45 दिनों के भीतर जमा कराए। इसके अतिरिक्त मानसिक संताप हेतु 10,000/- रुपये और वाद-व्यय के रूप में 5,000/- रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया।
आयोग के आदेश के अनुपालन में विपक्षी बीमा कंपनी द्वारा कुल डिक्री धनराशि 1,86,104/- रुपये आयोग के खाते में जमा कराई गई, जिसके पश्चात प्रकीर्ण वाद संख्या 24/2026 में पारित आदेशानुसार उक्त संपूर्ण धनराशि का एकाउंट पेई चेक परिवादिनी के पक्ष में जारी कर उन्हें सौंप दिया गया।
Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp – Channel Bulletin & Group Bulletin
- साक्ष्य के अभाव में हत्या का आरोपी दोषमुक्त, लचर विवेचना पर अदालत ने डीजीपी और पुलिस आयुक्त को भेजी आदेश की प्रति - October 16, 2026
- दहेज उत्पीड़न के मामले में पीड़िता के बयान दर्ज करने और मेडिकल कराने के अदालत ने दिए आदेश - October 16, 2026
- अवैध धर्मांतरण एवं अपहरण के चर्चित मामले में दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज - October 16, 2026





1 thought on “एलआईसी की सेवा में कमी पर आगरा उपभोक्ता आयोग का सख्त फैसला, पूरी परिपक्वता राशि व मुआवजे के भुगतान का दिया आदेश”