आगरा ।
न्यायालय ने एक चांदी व्यवसायी से एक करोड़ बारह लाख पैंसठ हजार (1,12,65,000/-) रुपये की भारी-भरकम साइबर ठगी के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
जिला जज माननीय संजय कुमार मलिक की अदालत ने यह आदेश पारित किया।
फेसबुक के जरिए बिछाया गया था जाल:
थाना साइबर क्राइम में दर्ज मुकदमे के अनुसार, चांदी व्यवसायी मनीष गुप्ता की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर राधिका राय नामक एक युवती से दोस्ती हुई थी।
युवती ने मैसेंजर के माध्यम से अपना मोबाइल नंबर वादी को भेजा। इसके बाद चैटिंग और कॉलिंग के जरिए उसने वादी को अपने जाल में फंसा लिया। राधिका ने रकम दोगुनी करने और मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर वादी से विभिन्न फर्जी कंपनियों में निवेश करवाया।
इस पूरी साजिश में राधिका ने आरोपी पराग जैसवाल और अन्य साथियों के साथ मिलकर वादी से 1,12,65,000/- रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया।
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मध्य प्रदेश से हुई थी आरोपी की गिरफ्तारी:
मामले की शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम थाना पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए आरोपी पराग जैसवाल (पुत्र विजय जैसवाल), निवासी गाडरवारा, थाना गाडरवारा, जिला नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश को गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस ने वैधानिक कार्रवाई पूरी करते हुए 18 अप्रैल 2026 को आरोपी को मध्य प्रदेश से पकड़कर जेल भेज दिया था।
न्यायालय की कार्यवाही:
आरोपी पराग जैसवाल की ओर से न्यायालय में जमानत पर रिहा होने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था।
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सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता राधा कृष्ण गुप्ता ने अभियोजन पक्ष की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया।
उन्होंने अपराध की प्रकृति और सुनियोजित तरीके से ठगी गई विशाल धनराशि का हवाला देते हुए न्यायालय के समक्ष अपने ठोस तर्क रखे।
जिला जज माननीय संजय कुमार मलिक ने दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुनने और अपराध की गंभीरता का अवलोकन करने के बाद आरोपी की जमानत याचिका को निरस्त करने के आदेश दिए।
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