आगरा ।
आगरा की एडीजे-8 अदालत के न्यायाधीश माननीय रविकांत ने दहेज हत्या के एक मामले में सुनवाई करते हुए मृतका के पति और सास को दोषी करार दिया है।
अदालत ने दोनों दोषियों को 10 वर्ष के कारावास और दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
घटना की पृष्ठभूमि:
वादी मुकदमा श्रीमती दीपा (निवासी रुई की मंडी, कलारी वाली गली, थाना शाहगंज, जिला आगरा) की पुत्री मोना दिवाकर का विवाह 7 दिसंबर 2020 को सूरज (पुत्र बैनी राम, निवासी ग्राम भवनपुरा जेंगारा, थाना फतेहपुर सीकरी, जिला आगरा) के साथ संपन्न हुआ था।
दहेज की मांग और हत्या:
प्राथमिकी में दर्ज तथ्यों के अनुसार, विवाह के बाद से ही मोना का पति सूरज और सास श्रीमती मुन्नी देवी दहेज से असंतुष्ट थे।
अतिरिक्त दहेज के रूप में एक लाख रुपये की मांग को लेकर वे लगातार मोना का उत्पीड़न करते थे और उस पर मायके से पैसे लाने का दबाव बनाते थे।
मांग पूरी करने में असमर्थता जताने पर, 16 जुलाई 2021 को आरोपियों ने मोना की हत्या कर दी।
पड़ोसियों द्वारा सूचना दिए जाने पर जब वादिया और अन्य परिजन घटनास्थल पर पहुंचे, तो मोना का शव घर के आंगन में पड़ा मिला और सभी ससुराल वाले मौके से फरार थे।
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न्यायालय की कार्यवाही:
इस प्रकरण में थाना फतेहपुर सीकरी पुलिस द्वारा मामला दर्ज कर जांच की गई। न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रदीप कुमार शर्मा ने पैरवी की।
अभियोजन द्वारा मामले को साबित करने के लिए अदालत के समक्ष मृतका की मां श्रीमती दीपा, सहायक पुलिस आयुक्त महेश कुमार और नायब तहसीलदार सत्य प्रकाश सहित कुल 8 गवाह पेश किए गए।
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अदालत का अंतिम फैसला:
न्यायाधीश माननीय रविकांत ने गवाहों के विस्तृत बयानों, मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता के ठोस तर्कों का अवलोकन किया।
सभी साक्ष्यों को आधार मानते हुए, अदालत ने पति सूरज और सास श्रीमती मुन्नी देवी को दहेज हत्या और अन्य संबंधित धाराओं में दोषसिद्ध किया।
इसके परिणामस्वरूप दोनों दोषियों को 10 वर्ष की कैद और अर्थदंड से दंडित करते हुए मामले का निस्तारण किया गया।
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