साक्ष्य के अभाव में हत्या का आरोपी दोषमुक्त, लचर विवेचना पर अदालत ने डीजीपी और पुलिस आयुक्त को भेजी आदेश की प्रति

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आगरा।

अपर जिला जज माननीय मृदुल दुबे की अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य न होने के कारण हत्या के आरोपी कुंटू उर्फ देवेंद्र सिंह को दोषमुक्त कर दिया है।

इसके साथ ही विवेचना में घोर लापरवाही बरतने पर अदालत ने मामले के विवेचक की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक लखनऊ, पुलिस आयुक्त आगरा और जिलाधिकारी आगरा को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं।

थाना सदर बाजार में दर्ज मामले के अनुसार, वादिया सीमा ने तहरीर देकर अवगत कराया था कि उनके पति मनोज ऑटो चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे।

22 जनवरी 2019 को वह अपना ऑटो लेकर निकले थे, लेकिन देर रात तक घर वापस नहीं पहुंचे और उनका मोबाइल फोन भी बंद मिला। अगले दिन स्थानीय निवासी द्वारा सूचना मिलने पर वादिया और उनके पुत्र ने रोहता इंटर कॉलेज के पीछे कच्चे रास्ते से मृतक का शव बरामद कर उसकी पहचान की।

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वादिया ने आशंका जताई थी कि घटना से करीब दो माह पूर्व हुए विवाद के चलते कुंटू उर्फ देवेंद्र सिंह ने उनके पति की हत्या की है।

तहरीर के आधार पर पुलिस ने अभियोग पंजीकृत कर आरोपी को जेल भेजा और बाद में अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से वादिया, मृतक के भाई और चिकित्सक सहित कुल आठ गवाह पेश किए गए।

अदालत ने पत्रावली का अवलोकन करने के उपरांत पाया कि प्रस्तुत साक्ष्यों से परिस्थिति जन्य साक्ष्य की कड़ियां आपस में स्थापित नहीं होती हैं।

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विवेचक ने ऐसा कोई स्वतंत्र गवाह प्रस्तुत नहीं किया जिसने मृतक को अंतिम बार आरोपी के साथ देखा हो। इसके अतिरिक्त घटना में प्रयुक्त हथियार और घटनाक्रम का कोई स्पष्ट विवरण भी विवेचना में शामिल नहीं था।

अदालत ने टिप्पणी की कि विवेचक द्वारा की गई विवेचना अव्यवस्थित, अपूर्ण और लचर थी।

मात्र केस डायरी के पर्चे काटने या आरोप पत्र दाखिल कर देने से किसी अभियुक्त का अपराध सिद्ध नहीं हो जाता। अदालत ने बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं अरविंद कुमार शर्मा, उमेश चंद शर्मा और मनीष पाठक के तर्कों को स्वीकार करते हुए साक्ष्य के अभाव में आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया।

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विवेक कुमार जैन
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