आगरा।
जनपद की एक विशेष अदालत ने सामूहिक दुराचार और पाक्सो (POCSO) एक्ट के गंभीर मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) माननीय कुंदन किशोर सिंह ने आरोपी वजीर और शहीद को दोषमुक्त करने के आदेश दिए।
क्या था मामला ?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 12 दिसंबर 2017 की है। थाना कागारोल क्षेत्र के एक गांव की निवासी महिला ने मुकदमा दर्ज कराया था कि उसकी 14 वर्षीया पुत्री शाम 5 बजे शौच के लिए खेतों की तरफ गई थी।
आरोप था कि वहां पहले से मौजूद वजीर (निवासी ग्राम मुरकिया) और शहीद (निवासी ग्राम बीसलपुर) ने किशोरी के मुंह में कपड़ा ठूंसकर उसके साथ सामूहिक दुराचार किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी।
अदालत में क्यों कमजोर हुआ केस ?
सुनवाई के दौरान मामला उस समय पूरी तरह पलट गया जब मुख्य गवाहों ने अभियोजन का साथ नहीं दिया।
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अदालत ने निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर आरोपियों को बरी किया:
* पहचान से इनकार: पीड़िता ने अदालत में खड़े होकर आरोपियों को पहचानने से साफ इनकार कर दिया।
* परिजन भी मुकरे: पीड़िता की मां (वादिनी), पिता और चश्मदीद गवाह भी अपने बयानों से मुकर गए।
* मेडिकल रिपोर्ट: मेडिकल परीक्षण में भी दुराचार की पुष्टि नहीं हुई।
* समय का विरोधाभास: एफआईआर में घटना का समय शाम 5 बजे दर्ज था, जबकि पीड़िता ने बयान में घटना सुबह 5 बजे की बताई।
अदालत का फैसला:
बचाव पक्ष के अधिवक्ता नीरज पाठक ने तर्क दिया कि आरोपियों को रंजिशन फंसाया गया है और उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है।
विशेष न्यायाधीश माननीय कुंदन किशोर सिंह ने साक्ष्यों के अभाव और गवाहों के मुकरने के कारण दोनों आरोपियों को रिहा करने के आदेश दिए।
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