आगरा:
दहेज हत्या और उत्पीड़न के एक मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे 5) माननीय विराट कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी पति प्रवीण और उसकी मां महादेवी को बरी करने के आदेश दिए हैं।
दिलचस्प बात यह रही कि मुकदमे के वादी (पिता) अपनी बात पर अड़े रहे, लेकिन उनकी पत्नी और बेटों की गवाही आरोपियों के पक्ष में रही, जिसके आधार पर अदालत ने यह फैसला सुनाया।
मामला थाना मलपुरा क्षेत्र का है, जहां वादी रामवीर सिंह ने वर्ष 2013 में अपनी पुत्री पिंकी की शादी प्रवीण के साथ की थी।
वादी का आरोप था कि अतिरिक्त दहेज के रूप में दो लाख रुपए की मांग पूरी न होने पर 20 जुलाई 2018 को उसके दामाद प्रवीण, समधन महादेवी और अन्य ससुरालीजनों ने मिलकर उसकी पुत्री की हत्या कर दी थी।

तहरीर के आधार पर पुलिस ने पति, सास, जेठ और जिठानी के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और हत्या का मामला दर्ज किया था, हालांकि जांच के दौरान जेठ और जिठानी के नाम गलत पाए जाने पर हटा दिए गए थे।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान वादी रामवीर सिंह अपने शुरुआती आरोपों पर कायम रहे, लेकिन उनकी पत्नी मलुकी देवी और पुत्रों श्याम सुंदर तथा राम प्रकाश सहित कुल 9 गवाह अदालत में पेश हुए।
सुनवाई के दौरान मृतका की मां और भाइयों ने अदालत में बयान दिया कि मृतका अपनी ससुराल में खुश थी और उससे कभी किसी ने अतिरिक्त दहेज की मांग नहीं की थी।
मृतका की मां ने यह भी बयान दिया कि उनकी बेटी जिद्दी और गुस्सैल स्वभाव की थी तथा उसने खुद फांसी लगाकर आत्महत्या की थी।
अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के अभाव और आरोपियों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं विजय आहूजा, विमू आहूजा तथा साजिद अहमद द्वारा रखे गए कानूनी तर्कों को सुनने के बाद आरोपी पति और सास को आरोपों से मुक्त कर दिया।
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