आगरा:
फर्जी फर्में गठित कर लाखों रुपये की जीएसटी चोरी करने के आरोपी की जमानत याचिका न्यायालय ने नामंजूर कर दी है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) माननीय पुष्कर उपाध्याय ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी रवि सिंह की जमानत अर्जी निरस्त करने के आदेश दिए।
मामला थाना लोहामंडी में दर्ज कराया गया था। वादी मुकदमा और राज्य कर अधिकारी (खंड 10) देवेंद्र कुमार के अनुसार, केंद्रीय क्षेत्राधिकार में पंजीकृत मेसर्स प्रकाश ट्रेडर्स के अभिलेखों की जांच के दौरान भारी अनियमितताएं पाई गई थीं।
उक्त फर्म ने व्यापार के नाम पर जीएसटी नंबर प्राप्त किया था, लेकिन भौतिक सत्यापन के दौरान फर्म का कोई अता-पता नहीं मिला।
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पोर्टल पर दर्ज मोबाइल नंबर भी लगातार बंद पाया गया।
जांच के दौरान आरोपी से बरामद लैपटॉप और मोबाइल फोन के डेटा से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर टैक्स चोरी के उद्देश्य से 2675 फर्जी फर्में तैयार की थीं।
इन फर्जी फर्मों के माध्यम से कुल 93,66,390.60/- रुपये की राजस्व चोरी का आरोप है।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता विमू आहूजा ने प्रभावी तर्क प्रस्तुत किए।
एडीजे प्रथम माननीय पुष्कर उपाध्याय ने अपराध की प्रकृति और सरकारी राजस्व को पहुंचाई गई क्षति को देखते हुए बुलंदशहर निवासी आरोपी रवि सिंह को राहत देने से इंकार कर दिया और उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
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