आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सहारनपुर के पूर्व बसपा एमएलसी हाजी इकबाल उर्फ बाला को बड़ा झटका देते हुए उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) को रद्द करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है।
नोएडा के इकोटेक-3 थाने में दर्ज 6.33 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के इस मामले में न्यायालय ने आरोपी को किसी भी प्रकार की राहत देने से मना करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी है।
मामले की पृष्ठभूमि:
यह प्रकरण रियल एस्टेट में प्लॉट विकास के नाम पर हुई धोखाधड़ी से जुड़ा है। शिकायतकर्ता नावेद अहमद का आरोप है कि संबंधित कंपनी ने उनसे 6.33 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम ली थी।
इसी मामले को लेकर हाजी इकबाल के खिलाफ नोएडा के इकोटेक-3 पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

जांच एसएफआईओ को हस्तांतरित:
उच्च न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए धोखाधड़ी की चल रही जांच को उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (यूपी एसटीएफ) से लेकर सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) को स्थानांतरित कर दिया है।
अदालत ने यूपी एसटीएफ को निर्देशित किया है कि वह केस डायरी और अब तक जब्त की गई सभी सामग्री अविलंब एसएफआईओ को सौंप दे।
न्यायालय की सख्त टिप्पणी:
याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अत्यंत सख्त रुख अपनाया। न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि इतने गंभीर आरोपों की जांच को शुरुआती चरण में किसी भी सूरत में दबाया नहीं जा सकता है, अन्यथा पीड़ित पक्ष को कभी भी न्याय नहीं मिल सकेगा।
सरकार की दलीलें और आरोपी की स्थिति:
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि पूर्व एमएलसी विदेश में बैठकर ‘व्हाइट-कॉलर’ (सफेदपोश) अपराध का एक बड़ा सिंडिकेट संचालित कर रहा है।
सरकार ने न्यायालय को अवगत कराया कि हाजी इकबाल पिछले दो वर्षों से फरार चल रहा है और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा उस पर इनाम भी घोषित किया जा चुका है।
यह महत्वपूर्ण आदेश इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह और न्यायमूर्ति लक्ष्मी कांत शुक्ला की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) द्वारा पारित किया गया है।
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