दहेज उत्पीड़न और मारपीट के मामले में पति समेत सास-ससुर बरी, गवाहों के मुकरने पर अदालत का फैसला

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा।

न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय माननीय शिखा सिंह की अदालत ने दहेज उत्पीड़न, मारपीट और अतिरिक्त दहेज की मांग के मामले में आरोपी पति, सास और ससुर को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया है।

वादिया और उनकी मां के अदालत में अपने पूर्व बयानों से मुकर जाने के कारण न्यायालय ने यह फैसला सुनाया।

प्राथमिकी और आरोप:

इस मामले की प्राथमिकी वादिया श्रीमती पूनम ने महिला थाने में दर्ज कराई थी। वादिया का आरोप था कि उनका विवाह 19 अप्रैल 2018 को आरोपी सनी उर्फ लक्की के साथ संपन्न हुआ था।

आरोप के मुताबिक, शादी में दिए गए दहेज से ससुराल वाले संतुष्ट नहीं थे। अतिरिक्त दहेज के रूप में एक बुलेट मोटरसाइकिल की मांग को लेकर आरोपी पति सनी, सास श्रीमती आशा और ससुर कैन सिंह वादिया का शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न करते थे।

प्राथमिकी में यह भी आरोप लगाया गया था कि मांग पूरी न होने पर 25 अप्रैल 2018 को आरोपियों ने वादिया के साथ मारपीट की। इसके बाद 10 जुलाई 2018 को एक बार फिर से मारपीट की गई और वादिया को घर से निकाल दिया गया।

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अदालत की कार्यवाही और फैसला:

मुकदमे के विचारण के दौरान, जब गवाही की बारी आई तो मुख्य गवाह वादिया श्रीमती पूनम और उनकी मां श्रीमती तुलसा देवी अदालत के समक्ष अपने पूर्व में दिए गए कथनों का समर्थन नहीं कर सकीं और अपने बयानों से मुकर गईं।

बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता बरूण कुमार शर्मा ने न्यायालय के समक्ष तर्क प्रस्तुत किया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है और मुख्य गवाहों ने भी आरोपों का समर्थन नहीं किया है।

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न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय माननीय शिखा सिंह की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत उपलब्ध नहीं है।

अतः साक्ष्य के अभाव और बचाव पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए, अदालत ने आरोपी पति सनी उर्फ लक्की, सास श्रीमती आशा और ससुर कैन सिंह को सभी आरोपों से ससम्मान बरी करने के आदेश दिए।

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विवेक कुमार जैन
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