स्वतंत्र गवाहों की कमी और बरामद माल पेश न कर पाना बना बचाव का आधार
आगरा।
विशेष न्यायाधीश (आर्थिक अपराध) माननीय ज्ञानेंद्र राव ने विद्युत खम्भों से लाखों रुपये के कॉपर वायर चोरी करने के मामले में आरोपित रवि अग्रवाल और धर्मवीर उर्फ धर्मेंद्र को दोषमुक्त करने का आदेश दिया है।
यह फैसला करीब 19 साल चले लंबे विचारण के बाद आया है, जिसमें पुलिस द्वारा पेश किए गए सबूत अदालत की कसौटी पर खरे नहीं उतरे।
क्या था मामला ?
थाना खैरागढ़ में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, 27 सितंबर 2006 की रात अज्ञात चोरों ने ग्राम धन्स पुरा से गड़ी करना के बीच 11 केवी कोलुआ फीडर की लाइन को निशाना बनाया था। अवर अभियंता बी.एस. त्यागी ने आरोप लगाया था कि चोरों ने 10 खम्भों के बीच के तार और अन्य कीमती विद्युत उपकरण चोरी कर लिए हैं।
पुलिस ने इस मामले में जांच करते हुए रवि अग्रवाल (निवासी न्यू विजय नगर, हरी पर्वत) और धर्मवीर (निवासी गड़ी करना, खैरागढ़) सहित अन्य को गिरफ्तार किया था।
उस समय पुलिस ने दावा किया था कि आरोपियों के कब्जे से चोरी किया गया लाखों रुपये का माल बरामद कर लिया गया है।

अदालत में क्यों कमजोर पड़ा अभियोजन ?
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से केवल वादी मुकदमा बी.एस. त्यागी और उपनिरीक्षक रविंद्र प्रसाद गोड की ही गवाही दर्ज कराई जा सकी।
आरोपियों के वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक कुमार शर्मा ने अदालत में प्रभावी तर्क रखते हुए पुलिसिया कार्यवाही की विसंगतियों को उजागर किया।
न्यायालय ने अपने निर्णय में मुख्य रूप से दो बिंदुओं को बरी किए जाने का आधार बनाया:
स्वतंत्र गवाहों का अभाव: बरामदगी के समय पुलिस ने किसी भी सार्वजनिक या स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया था।
माल की अनुपस्थिति: अभियोजन पक्ष कथित तौर पर बरामद किए गए तार और उपकरणों को साक्ष्य के तौर पर अदालत के समक्ष पेश करने में विफल रहा।
न्यायिक आदेश:
विशेष न्यायाधीश माननीय ज्ञानेंद्र राव ने साक्ष्य के अभाव और विधिक त्रुटियों को देखते हुए आरोपियों को बरी करने का आदेश सुनाया।
अदालत ने माना कि बिना किसी स्वतंत्र गवाह और बरामद माल की भौतिक उपस्थिति के, आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
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