शादी का झांसा देकर 9 साल तक यौन शोषण: एससी/एसटी एक्ट की विशेष अदालत ने ताजगंज पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के दिए आदेश

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा:

जनपद की विशेष न्यायाधीश (SC/ST एक्ट) माननीय शिव कुमार की अदालत ने एक गंभीर मामले में संज्ञान लेते हुए थाना ताजगंज पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है।

मामला प्रेम संबंध की आड़ में एक दलित युवती के 9 वर्षों तक शारीरिक शोषण, अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने से जुड़ा है।

9 साल का प्रेम संबंध और धोखे का आरोप:

वादिनी (पीड़िता) ने अपने अधिवक्ता सुमित पालीवाल के माध्यम से अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर आरोप लगाया कि शमशाबाद रोड स्थित नौफरी निवासी अरविन्द कुमार के साथ उसके पिछले 9 वर्षों से प्रेम संबंध थे।

* मंदिर में विवाह का झांसा: आरोपी ने मंदिर में वादिनी की मांग भरकर उसे पत्नी का दर्जा देने का वादा किया और निरंतर शारीरिक शोषण किया।

* गर्भपात का दबाव: पीड़िता का आरोप है कि इस दौरान वह कई बार गर्भवती हुई, लेकिन आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसका गर्भपात करा दिया।

जातिसूचक अपमान और ब्लैकमेलिंग:

मामले में मोड़ तब आया जब आरोपी के परिजनों को इस संबंध की जानकारी हुई।

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आरोप के अनुसार:

* परिजनों का दुर्व्यवहार: आरोपी के माता-पिता और भाइयों ने वादिनी को घर बुलाकर गाली-गलौज की और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर उसे अपमानित किया।

* वीडियो वायरल करने की धमकी: जब पीड़िता ने विरोध किया, तो अरविन्द ने उसकी अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और पैसों की मांग की।

* ताजा घटना: आरोप है कि 7 जनवरी 2026 को वीडियो वायरल करने की धमकी देकर आरोपी ने उसे एक होटल में बुलाया और वहां जबरन दुराचार किया।

न्यायालय का आदेश:

विशेष न्यायाधीश माननीय शिव कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थानाध्यक्ष ताजगंज को निम्नलिखित निर्देशों के साथ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है:

* मुख्य आरोपी अरविन्द: इसके विरुद्ध दुराचार (Rape) और IT एक्ट की धाराओं में कार्यवाही।

* परिजनों के विरुद्ध: आरोपी के पिता, माता और भाइयों के विरुद्ध गाली-गलौज और दलित उत्पीड़न (SC/ST Act) के आरोपों में विवेचना।

विधिक टिप्पणी:

माननीय न्यायालय का यह आदेश दर्शाता है कि लंबे समय तक चले संबंधों में भी यदि सहमति धोखे (शादी का झूठा वादा) पर आधारित है, तो उसे अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा।

साथ ही, तकनीक का दुरुपयोग (वीडियो ब्लैकमेलिंग) मामले को और भी गंभीर बनाता है।

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विवेक कुमार जैन
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