आगरा:
तेरह वर्ष पूर्व एक परिवार को रास्ते में रोककर लूटपाट करने और विरोध करने पर युवती की निर्मम हत्या करने वाले दो अपराधियों को अदालत ने उनके किए की सजा सुना दी है।
विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावी क्षेत्र) माननीय नीरज कुमार बक्शी ने आरोपी तारा सिंह उर्फ तरेया और वीर उर्फ भंडारी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
घटना का विवरण: खुशियों के सफर में मातम:
घटना 2 मई 2012 की है। वादी रघुवीर शर्मा अपनी पत्नी ममता और पुत्री संध्या के साथ मोटरसाइकिल से धीमश्री गांव में एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने जा रहे थे।
सुबह करीब 9 बजे, थाना फतेहाबाद क्षेत्र के अरनोटा नदी पुल के पास पल्सर सवार बदमाशों ने पीछे से ताबड़तोड़ फायरिंग कर उन्हें रुकने पर मजबूर कर दिया।
हथियार के बल पर बदमाशों ने ममता शर्मा से सोने के जेवर और नगदी लूट ली। जब इसका विरोध किया गया, तो बदमाशों ने वादी की पुत्री संध्या के सिर में गोली मार दी, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। वारदात को अंजाम देकर आरोपी दहशत फैलाते हुए फरार हो गए थे।
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कानूनी प्रक्रिया और फैसला:
पुलिस ने विवेचना के दौरान राजस्थान के धौलपुर निवासी तारा सिंह और आगरा के निबोहरा निवासी वीर सहित अन्य को गिरफ्तार कर लूट का सामान बरामद किया था।
* मृत्यु: मुकदमे के विचारण के दौरान एक आरोपी बब्बू की धौलपुर जेल में मृत्यु हो गई, जिसके बाद उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
* बरी: साक्ष्य के अभाव में अदालत ने एक अन्य आरोपी भगवान दास उर्फ टिंकू को बरी करने का आदेश दिया।
अदालत का कड़ा रुख:
विशेष न्यायाधीश ने गवाहों के बयान, मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरी बाबू के प्रभावी तर्कों के आधार पर आरोपियों को जघन्य कृत्य का दोषी माना।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि समाज में ऐसी आपराधिक प्रवृत्तियों के लिए कोई स्थान नहीं है और दोषियों को उनके शेष जीवन के लिए सलाखों के पीछे भेज दिया।
मामले की मुख्य बातें:
* अपराध की तिथि: 2 मई 2012
* प्रमुख धाराएं: लूट, हत्या और दस्यु प्रभावी क्षेत्र अधिनियम।
* दोषी: तारा सिंह उर्फ तरेया एवं वीर उर्फ भंडारी।
* सजा: आजीवन कारावास और अर्थदंड।
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