आगरा:
14 वर्षीय किशोरी के साथ सामूहिक दुराचार, पॉक्सो अधिनियम और दलित उत्पीड़न के गंभीर मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट माननीय सोनिका चौधरी की अदालत ने दो आरोपियों को बरी कर दिया है।
यह फैसला मुख्य रूप से इसलिए आया क्योंकि मामले की पीड़िता और उसकी माँ (वादनी) अदालत में अपने पूर्व के आरोपों और बयानों से मुकर गईं।
बरी होने का आधार:
विशेष न्यायाधीश माननीय सोनिका चौधरी ने साक्ष्य के अभाव को देखते हुए तरुण और होटल मैनेजर गजेंद्र उर्फ अभिषेक को बरी करने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने महत्वपूर्ण गवाही से मुकरने के लिए वादनी मुकदमा/पीड़िता की माँ के विरुद्ध धारा-22 पॉक्सो एक्ट के तहत विधिक कार्यवाही करने के भी आदेश दिए हैं।
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मामले का विवरण:
थाना जगदीशपुरा में 8 जनवरी 2020 को दर्ज मामले के अनुसार, वादनी मुकदमा ने तहरीर में आरोप लगाया था:
* तीन माह पूर्व आरोपी तरुण चौहान (पुत्र स्व. पवन कुमार चौहान, निवासी अवध पुरी) बहला-फुसलाकर उसकी 14 वर्षीय पुत्री को बिचपुरी स्थित एक होटल में ले गया।
* वहाँ तरुण ने उसकी पुत्री के साथ दुराचार किया।
* पुत्री के अनुसार, होटल मैनेजर गजेंद्र उर्फ अभिषेक (पुत्र मनवीर सिंह, निवासी मघटई) ने भी उसके साथ दुराचार किया।
* बाद में आरोपियों ने वीडियो और फोटो के आधार पर ब्लैक मेल कर किशोरी को परेशान किया।
वादनी की तहरीर पर पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुराचार, पॉक्सो एवं दलित उत्पीड़न की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
मैजिस्ट्रेट के सामने बयान और अदालत में पलटना:
पुलिस ने पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कराया और उसे बयान के लिए मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया था।
* पुलिस/मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान: पीड़िता ने आरोपियों के विरुद्ध दुराचार की पुष्टि करते हुए कहा था कि तरुण उसे होटल ले गया, जहाँ नशीली कोल्डड्रिंक पिलाकर तरुण और होटल मैनेजर ने उसके साथ दुराचार किया। उसने यह भी बताया कि वीडियो और फोटो खींचकर उन्हें कई बार संबंध बनाने के लिए विवश किया गया।
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* अदालत में बयान: इसके विपरीत, अदालत में दिए अपने बयान में पीड़िता ने कहा कि वह घटना वाले दिन अकेली साइकिल से रेस्टोरेंट खाना खाने गई थी और साइकिल से गिरने के कारण उसके प्राइवेट पार्ट पर चोट आई थी। उसने साफ कहा कि वह तरुण और गजेंद्र उर्फ अभिषेक को नहीं जानती है और इन्होंने उसके साथ कुछ नहीं किया।
गवाहों का मुकरना:
अदालत में इस मामले की वादनी मुकदमा (पीड़िता की माँ), पीड़िता स्वयं और उसका भाई सभी अपने पूर्व की गवाही से मुकर गए।
आरोपियों के अधिवक्ता विजय पाल सिंह बघेल के तर्क और साक्ष्य के अभाव को देखते हुए, विशेष न्यायाधीश माननीय सोनिका चौधरी ने दोनों आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।
अदालत ने गवाही से पलटने के कारण वादनी मुकदमा के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट की धारा 22 के तहत विधिक कार्यवाही के आदेश जारी किए हैं।
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