हाईकोर्ट ने सरकार के मुख्य सचिव को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया
कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत संपन्न विवाहों का रजिस्ट्रेशन दिल्ली (विवाह का अनिवार्य पंजीकरण) आदेश, 2014 के अनुसार किया जाए ऑनलाइन
आगरा /नई दिल्ली 11 नवंबर ।
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव नरूला ने मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से मुस्लिम विवाहों का समयबद्ध तरीके से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के मुद्दे पर गौर करने और 04 जुलाई को पारित निर्णय का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, जिसमें दिल्ली सरकार को सरकारी ऑनलाइन पोर्टल पर मुस्लिम विवाहों का रजिस्ट्रेशन सक्षम करने के लिए तुरंत कदम उठाने का निर्देश दिया गया।
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न्यायालय ने कहा,
“जहां तक इस न्यायालय के दिनांक 04 जुलाई, 2024 के निर्णय के कार्यान्वयन का सवाल है, चूंकि प्रतिवादियों ने उक्त निर्णय के कार्यान्वयन में कोई ठोस कदम नहीं उठाए, इसलिए यह निर्देश दिया जाता है कि मुख्य सचिव, जीएनसीटीडी, व्यक्तिगत रूप से इस मुद्दे पर गौर करेंगे ताकि उक्त निर्णय का समयबद्ध तरीके से अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।”
जस्टिस नरूला ने मुस्लिम दंपत्ति द्वारा दायर याचिका का निपटारा किया, जिसमें विशेष विवाह अधिनियम के तहत एसडीएम द्वारा जारी किए गए उनका विवाह प्रमाणपत्र रद्द करने की मांग की गई। दंपत्ति का कहना था कि इस मामले में विशेष विवाह अधिनियम लागू नहीं होता। उन्होंने कहा कि मुस्लिम विवाहों के रजिस्ट्रेशन के लिए प्रभावी ऑनलाइन सिस्टम की अनुपस्थिति में उन्होंने गलती से उक्त अधिनियम के तहत अपना विवाह रजिस्टर्ड कर लिया था।

दंपत्ति की ओर से पेश हुए एडवोकेट एम सूफियान सिद्दीकी ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को दिल्ली सरकार द्वारा अनिवार्य “बहिष्कृत विवाह रजिस्ट्रेशन सिस्टम” के अधीन किया गया, जिसमें इसके ऑनलाइन पोर्टल पर केवल दो विकल्प दिए गए- हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत रजिस्ट्रेशन, या विशेष विवाह अधिनियम, 1954।
उन्होंने तर्क दिया कि दिल्ली (विवाह का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन) आदेश, 2014 के तहत ऑफ़लाइन विकल्प या उपयुक्त ऑनलाइन विकल्प की अनुपस्थिति ने दंपत्ति को प्रभावी रूप से उनके विश्वास और इरादे के विपरीत वैधानिक व्यवस्था में धकेल दिया, जिसने भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 के तहत उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया।
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दंपत्ति को राहत देते हुए न्यायालय ने निर्देश दिया कि दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग द्वारा जारी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द किया जाए।
न्यायालय ने कहा,
“उपर्युक्त निर्देशों के साथ वर्तमान याचिका का निपटारा किया जाता है। इस आदेश की प्रति जीएनसीटीडी के मुख्य सचिव को भेजी जाए।”
केस टाइटल: फैजान अयूबी एवं अन्य बनाम दिल्ली सरकार एवं अन्य।
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साभार: लाइव लॉ
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