आगरा।
आगरा की एक स्थानीय अदालत ने ₹3.50 लाख के चेक डिसऑनर (Check Dishonour) मामले में आरोपी के विरुद्ध संज्ञान लेते हुए उसे मुकदमे के विचारण हेतु तलब किया है।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM-7) माननीय अनुज कुमार सिंह ने साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आरोपी आशीष अग्रवाल को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि:
वादी नीरज शर्मा (निवासी: अलका कुंज, कमला नगर) ने अपने अधिवक्ता राजेश यादव के माध्यम से धारा 138, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) के तहत परिवाद दायर किया था।
परिवाद के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:
* ऋण का लेनदेन: आरोपी आशीष अग्रवाल (निवासी: एच.आर. अपार्टमेंट, दयाल बाग) ने 10 जून 2024 को वादी से व्यक्तिगत आवश्यकता हेतु ₹3,50,000/- उधार लिए थे।
* अदायगी का वादा: आरोपी ने उक्त राशि को दो माह के भीतर वापस करने का वचन दिया था।
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* चेक डिसऑनर: ऋण अदायगी हेतु आरोपी द्वारा दिया गया चेक जब बैंक में प्रस्तुत किया गया, तो वह पर्याप्त धनराशि न होने के कारण ‘डिसऑनर’ होकर वापस आ गया।
विधिक कार्यवाही और कोर्ट का आदेश:
सुनवाई के दौरान वादी के अधिवक्ता राजेश यादव ने तर्क दिया कि चेक बाउंस होने के पश्चात कानूनी नोटिस दिए जाने के बावजूद आरोपी ने भुगतान नहीं किया, जो कि कानूनन अपराध है।
अदालत ने पत्रावली पर मौजूद बैंक रिटर्न मेमो, नोटिस की प्रति और वादी के बयानों का अवलोकन करने के बाद माना कि आरोपी के विरुद्ध मुकदमा चलाने हेतु पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
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न्यायालय का निर्णय:
एसीजेएम-7 माननीय अनुज कुमार सिंह ने मामले को विचारण (Trial) के लिए स्वीकार करते हुए आरोपी आशीष अग्रवाल को समन जारी करने और अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया।
केस विवरण:
* न्यायालय: अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (कोर्ट संख्या-7), आगरा
* पक्षकार: नीरज शर्मा बनाम आशीष अग्रवाल
* अधिनियम: नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138
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