आगरा।
मानसिक क्रूरता के एक मामले में, आगरा की एक अदालत ने एक पति की याचिका को स्वीकार करते हुए उसे तलाक की मंजूरी दे दी है।
कोर्ट ने पति को अपनी पत्नी को एकमुश्त भरण-पोषण के रूप में 5 लाख रुपये देने का भी आदेश दिया है। यह फैसला एक ऐसे मामले में आया है जहां शादी के समय ही पत्नी दो महीने की गर्भवती निकली थी।
शादी के बाद सामने आया चौंकाने वाला सच

मामले के अनुसार, आवास विकास कॉलोनी, बोदला निवासी एक व्यक्ति, जो बैंक में एक उच्च पद पर कार्यरत है, का विवाह 2017 में फिरोजाबाद की एक युवती से हुआ था।
पति ने कोर्ट में बताया कि शादी के तुरंत बाद ही उसकी पत्नी की तबीयत खराब रहने लगी। शादी के एक हफ्ते बाद, 24 नवंबर 2017 को जब पत्नी को पेट दर्द हुआ, तो उसे डॉक्टर को दिखाया गया।
डॉक्टर की सलाह पर जब अल्ट्रासाउंड कराया गया, तो रिपोर्ट देखकर सब हैरान रह गए। पत्नी शादी के पहले से ही दो महीने की गर्भवती थी, जबकि पति के अनुसार, विवाह से पहले या बाद में उनके बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं बना था।
यह जानकारी पत्नी के परिजनों को दी गई। शुरुआत में तो उन्होंने इसे मानने से इंकार कर दिया, लेकिन जब उन्होंने अपनी पहचान वाले डॉक्टर से दोबारा अल्ट्रासाउंड कराया, तो रिपोर्ट वही आई। इसके बाद पत्नी के परिजनों ने चुपके से ताजगंज के एक नर्सिंग होम में उसका गर्भपात करा दिया।
पत्नी ने स्वीकार किया सच:
पत्नी ने यह स्वीकार किया कि उसकी शादी उसकी मर्जी के खिलाफ हुई थी और वह किसी और लड़के से प्यार करती थी और उसी से शादी करना चाहती थी। उसने यह भी बताया कि गर्भ में पल रहा बच्चा उसी प्रेमी का था।

पति ने दिया दूसरा मौका, लेकिन नहीं सुधरा व्यवहार:
इस घटना के बाद, कई सामाजिक पंचायतें हुईं। पति के पिता ने बड़ा दिल दिखाते हुए उसे अपनी पत्नी को अपनाने के लिए राजी किया। पति ने भी अपने पिता की बात मानकर पत्नी को स्वीकार कर लिया, लेकिन पत्नी के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया। वह पति और उसके परिवार वालों की उपेक्षा करती रही। 2019 में जब वह दोबारा गर्भवती हुई, तो भी उसका व्यवहार नहीं बदला। वह अपने बेटे का भी ध्यान नहीं रखती थी और उसके साथ मारपीट करती थी।
इन सभी घटनाओं से परेशान होकर पति ने अपने वकील शैलेंद्र पाल सिंह, आकाश कुमार दीक्षित और सुमित कुमार के माध्यम से तलाक की याचिका दायर की।
कोर्ट ने पत्नी के इस व्यवहार को ‘मानसिक क्रूरता’ मानते हुए विवाह विच्छेद की याचिका को स्वीकार कर लिया और तलाक का आदेश दे दिया। साथ ही, कोर्ट ने पति को पत्नी को एकमुश्त 5 लाख रुपये का गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया।
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