आगरा:
ताजनगरी की एक अदालत में चल रहे बहुचर्चित ‘विजयपुर सीकरी’ (फतेहपुर सीकरी) मामले में आज सिविल जज सीनियर डिवीजन (फास्ट ट्रैक कोर्ट) में सुनवाई हुई।
न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई के लिए 24 फरवरी की अगली तिथि निर्धारित की है।
विवाद का मुख्य आधार: ‘फतेहपुर’ या ‘विजयपुर’?
वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह (केस संख्या-1049/2024, अजय प्रताप सिंह आदि बनाम के के मोहम्मद आदि ने अदालत में तर्क दिया कि वर्तमान फतेहपुर सीकरी वास्तव में सिकरवार राजाओं द्वारा बसाया गया ‘विजयपुर सीकरी’ नगर है।
उनके अनुसार:
मुस्लिम अभिलेखों में इसे ‘फतहपुर सीकरी’ लिखा गया, जो विजयपुर का ही अनुवाद है (उर्दू/फारसी में विजय को ‘फतह’ कहा जाता है)।
आगरा गजेटियर में भी इस वंश के राजा विजय सिंह सिकरवार का उल्लेख मिलता है, जिनके नाम पर इस नगर का नामकरण हुआ था।
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पुरातत्व साक्ष्यों का दिया गया हवाला:
सुनवाई के दौरान वादी पक्ष ने अपने दावों को पुख्ता करने के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत किए है ।
पिछली सुनवाई में पूर्व अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. डी.वी. शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक ‘आर्कियोलॉजी ऑफ फतेहपुर सीकरी: न्यू डिस्कवरीज’ की छाया प्रति अदालत में दाखिल की गई थी।
अधिवक्ता ने दावा किया कि फतेहपुर सीकरी किले के म्यूजियम में आज भी सन 1000 ईस्वी के आसपास की हिंदू सभ्यता के अनेक अवशेष मौजूद हैं, जो इसके मूल रूप से हिंदू नगर होने का प्रमाण देते हैं।
अभी इस मामले में विपक्षी पक्ष, पूर्व एएसआई अधिकारी के.के. मोहम्मद, का लिखित जवाब आना अभी शेष है।
अदालत अब 24 फरवरी को इस मामले में आगे की दलीलें सुनेगी।
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