आगरा:
आगरा के सिकंदरा थाना क्षेत्र में एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला सामने आया है।
एक चाचा को अपनी ही सात साल की भतीजी के साथ दुराचार करने और परिवार द्वारा पीड़िता और उसकी मां को बंधक बनाकर जान से मारने की धमकी देने के जुर्म में दोषी पाया गया है।
अपर जिला न्यायाधीश (एडीजे-28) माननीय शिव कुमार ने आरोपी हरवेंद्र उर्फ हरेंद्र को 20 साल के सश्रम कारावास (रिगोरस इम्प्रिजनमेंट) और 51 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
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क्या है पूरा मामला ?
यह घटना 11 जनवरी 2022 की है, जब पीड़िता की मां अपनी बहन के साथ एक शोक सभा में गई थीं। उन्होंने अपनी बेटी को अपने देवर हरवेंद्र उर्फ हरेंद्र और परिवार के अन्य सदस्यों के पास सुरक्षित छोड़ा था।
शाम को जब वह वापस आईं, तो उनकी बेटी डरी-सहमी और परेशान मिली। पूछने पर बच्ची ने बताया कि उसके चाचा ने उसके साथ गलत काम किया है, जिससे उसके पेट में दर्द हो रहा है।
पीड़िता की मां ने जब यह बात अपने पति और सास को बताई, तो उन्होंने उसे चुप करा दिया और धमकाया। अगले दिन, सास बच्ची को इलाज के बहाने कहीं और ले गईं।
जब पीड़िता की मां ने आरोपी देवर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कही, तो उसके पति बबलू, सास श्रीमती मीरा और आरोपी देवर ने मिलकर उसे और उसकी बेटी को कमरे में बंद कर दिया।
उन लोगों ने बेरहमी से बेल्ट से मारपीट की और धमकी दी कि अगर वह थाने गईं तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा।

न्याय की लड़ाई:
परिवार के इस अमानवीय बर्ताव के बावजूद, पीड़िता की मां ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने रिश्ते-नातों को दरकिनार करते हुए 23 फरवरी 2022 को सिकंदरा थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने पीड़िता के पति और सास के खिलाफ बंधक बनाने, मारपीट करने और धमकी देने के आरोप में, जबकि आरोपी देवर के खिलाफ दुराचार की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया।
अदालत का फैसला:
एसपीओ (विशेष अभियोजन अधिकारी) माधव शर्मा ने इस मामले को मजबूती से अदालत में पेश किया।
उन्होंने पीड़िता, उसकी मां, डॉक्टरों, और पुलिसकर्मियों सहित सभी गवाहों के बयान दर्ज कराए। इन बयानों और साक्ष्यों के आधार पर, एडीजे-28 ने आरोपी हरवेंद्र उर्फ हरेंद्र को दोषी ठहराया और उसे 20 साल की कड़ी सजा सुनाई।
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माने की राशि में से आधी रकम पीड़िता को दी जाए। इसके अलावा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भी पीड़िता को उचित मुआवजा देने के लिए आदेश की प्रति भेजी गई है। पीड़िता के पति बबलू और सास श्रीमती मीरा की फाइलें 19 अगस्त 2025 को अदालत द्वारा आरोपी से अलग कर दी गई थीं।
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