गैंगस्टर एक्ट के मामले में 17 साल बाद दो आरोपी बरी, साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने सुनाया फैसला

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आगरा।

गैंगस्टर एक्ट के एक पुराने मामले में विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) माननीय विवेक कुमार की अदालत ने साक्ष्य के अभाव में दो आरोपियों को 17 साल बाद बरी कर दिया है।

अदालत ने बचाव पक्ष की उन दलीलों को स्वीकार कर लिया, जिसमें बताया गया था कि जिन मुकदमों के आधार पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया था, उनमें आरोपी पहले ही दोषमुक्त हो चुके हैं।

यह मामला थाना लोहामंडी से जुड़ा है। पुलिस द्वारा दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन थानाध्यक्ष लोहामंडी आर. पी. सिंह ने वर्ष 2009 में आरोपी पंकज (निवासी ग्यासपुरा, थाना शाहगंज) और श्याम (निवासी राज नगर, थाना लोहामंडी) तथा अन्य के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस का आरोप था

कि पंकज ने एक संगठित गिरोह बनाया हुआ है, जिसमें श्याम और अन्य बदमाश शामिल हैं। इन पर महिलाओं के गले से चेन तोड़ने, पर्स लूटने और अन्य गंभीर अपराधों के जरिए अवैध धन अर्जित करने का आरोप था। पुलिस ने इन पर लंबित आपराधिक मुकदमों का गैंग चार्ट भी अदालत में दाखिल किया था।

न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान वादी (तत्कालीन एसओ) सहित कुल चार गवाह पेश हुए।

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आरोपियों की ओर से अधिवक्ता शुभम झा ने अदालत के समक्ष अपना कानूनी पक्ष रखा।

उन्होंने तर्क दिया कि जिन मुकदमों का हवाला देकर आरोपियों पर गिरोहबंद अधिनियम (गैंगस्टर एक्ट) के तहत कार्रवाई की गई थी, उन सभी मूल मामलों में वे पहले ही बरी हो चुके हैं।

अधिवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपियों के खिलाफ इसके अलावा कोई अन्य मुकदमा दर्ज नहीं है और पुलिस ने उनसे किसी भी प्रकार की कोई बरामदगी भी नहीं दर्शाई है।

विशेष न्यायाधीश माननीय विवेक कुमार ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का गहनता से अवलोकन किया।

न्यायालय ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए साक्ष्य के अभाव में दोनों आरोपियों, पंकज और श्याम को दोषमुक्त करते हुए बरी करने के आदेश दिए।

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विवेक कुमार जैन
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