आगरा।
उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद की एक अदालत ने सगे चाचा की निर्मम हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-8) माननीय संजय के. लाल ने तीन सगे भाइयों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
साथ ही, अदालत ने दोषियों पर कुल 3 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
मामले की पृष्ठभूमि:
यह मामला थाना डोकी के ग्राम सौरा का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 4 अक्टूबर 2020 को वादी विनीत कुमार के पिता मुकेश चंद की हत्या उनके ही सगे भतीजों गिरीश, मनीष और अमित (पुत्रगण घूरे लाल) ने कर दी थी।
विवाद की जड़ पारिवारिक कलह थी। आरोपी भाई अपने बुजुर्ग पिता घूरे लाल के साथ अक्सर मारपीट करते थे और उनसे पैसों की मांग करते थे।
मृतक मुकेश चंद अपने भाई की दयनीय हालत देखकर आरोपियों का विरोध करते थे और उन्हें डांटते-फटकारते थे। इसी रंजिश के चलते आरोपियों ने उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी।
वारदात का विवरण:
घटना के दिन जब मुकेश चंद बाजरे के खेत में थे, तब तीनों भाइयों ने उन्हें घेर लिया।
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* मनीष और अमित: इन्होंने मृतक के हाथ-पैर पकड़कर उन्हें जमीन पर गिरा दिया।
* गिरीश: इसने उस्तरे से मुकेश चंद का गला रेत दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
मृतक की पत्नी श्रीमती इमरती देवी और पुत्र नीरज, जो पास ही खेत में काम कर रहे थे, उनके शोर मचाने पर आरोपी मौके से फरार हो गए थे।
न्यायिक प्रक्रिया और फैसला:
पुलिस द्वारा दाखिल आरोप पत्र (Charge Sheet) के आधार पर मामले की सुनवाई चली।
* अभियोजन पक्ष: सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रदीप कुमार शर्मा ने वादी विनीत, चश्मदीद गवाहों और डॉक्टर राघवाचार्य सहित कुल 8 गवाह पेश किए।
* बचाव पक्ष: आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए 3 गवाह पेश किए।
अदालत का निर्णय:
माननीय न्यायाधीश ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयानों को पुख्ता मानते हुए तीनों भाइयों को ‘एक राय होकर हत्या’ करने का दोषी पाया।
अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और अर्थदंड न भरने पर अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान किया है।
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