राजस्थान उच्च न्यायालय: आईएएस अखिल अरोड़ा की बढ़ सकती है मुश्किलें, हाईकोर्ट ने डीओआईटी को बताया सबसे भ्रष्ट विभाग, जानें क्यों ?

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आगरा /जयपुर 8 सितंबर।

राजस्थान में वित्त विभाग के एसीएस और डीओआईटी के तत्कालीन चेयरमैन आईएएस अखिल अरोड़ा की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। हाईकोर्ट ने डीओआईटी को राजस्थान का सबसे भ्रष्ट महकमा बताते हुए पिछले पांच सालों में इसमें हुए सभी टेंडरों की जांच के आदेश एसीबी डीजी को दिए हैं।

गौरतलब है कि इनमें से 90 प्रतिशत से ज्यादा टेंडर अखिल अरोड़ा के कार्यकाल में ही किए गए क्योंकि बीते 10 सालों में से 5 साल के लगभग अरोड़ा ही इस विभाग में रहे हैं।

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के डीओआईटी विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर बेहद तल्ख टिप्प्णी की है। याचिकाकर्ता डॉ. टीएन शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने शुक्रवार एसीबी डीजी को तलब किया था।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की है कि डीओआईटी राजस्थान का सबसे भ्रष्ट विभाग बन चुका है और यहां लोगों के पास इतना सोना है कि उसे घर में रखने की जगह भी नहीं मिल रही।

 

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने एसीबी डीजी को निर्देश दिए कि डीओआईटी विभाग में पिछले पांच सालों में जितने भी टेंडर हुए हैं उनकी जांच 4 सप्ताह में कर हाईकोर्ट को पेश करे।

याचिकाकर्ता डॉ. टीएन शर्मा ने बताया कि डीओआईटी विभाग के राजनैट प्रोजेक्ट के ओआईसी कुलदीप यादव के खिलाफ आय से अधिक अकूत संपत्ति जुटाने के साक्ष्य मिले थे। लेकिन तत्कालीन चेयरमैन अखिल अरोड़ा के प्रभाव में एसीबी ने इस मामले में एफआर लगा दी।

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सबसे लंबे समय तक डीओआईटी में रहे अरोड़ा

अखिल अरोड़ा डीओआईटी में सबसे लंबे समय तक रहने वाले आईएएस अफसर हैं। पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार में वे 2013 से 2017 तक डीओआईटी के सेक्रेट्री रहे। इसके बाद गहलोत सरकार आने के कुछ समय बाद ही वे फिर डीओआईटी में आ गए। जनवरी 2024 में मौजूदा सरकार ने उनसे डीओआईटी विभाग वापस लिया।

इनके कार्यकाल में विभाग का बजट 15 गुना बढ़ा

बीते 10 सालों में डीओआईटी का बजट करीब-करीब 15 गुना तक बढ़ गया। वित्त वर्ष 2014-15 में वित्तीय लक्ष्य 367 करोड़ रुपए था जो 2023-24 में 5 हजार करोड़ से भी ज्यादा पहुंच गया। इस दौरान विभाग में हजारों करोड़ रुपए के टेंडर हुए जिनमें से ज्यादातर में बड़े घोटाले सामने आए।

एसीबी ने खुद सरकार को अरोड़ा के खिलाफ जांच की अनुमति के लिए लिखा था

डीओआईटी की टेंडर पत्रावलियों में कितनी गड़बड़ी है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल अक्टूबर में तत्कालीन एसीबी डीजी हेमंत प्रियदर्शी ने सरकार को पत्र लिखकर अखिल अरोड़ा के खिलाफ जांच की अनुमति मांगी थी। इसमें वीडियो वॉल टेंडर प्रत्रावली, सेल्प सर्विस कियोस्क प्रोजेक्ट और पहचान कियोक्स प्रोक्योरमेंट से जुड़ी टेंडर पत्रावलियों की गड़बड़ी का जिक्र था। इस पत्र में एसीबी ने सरकार को लिखा कि योजना भवन स्थित डीओआईटी की जब्त शुदा टेंडर पत्रावलियों का परीक्षण करने के बाद पाया गया कि यह विस्तृत परीक्षण योग्य है। इसलिए एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के 1998 की धारा ‘17 ए’ के तहत सरकार से अखिल अरोड़ा के खिलाफ अनुसंधान की अनुमति मांगी थी।

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बीजेपी ने उठाया मामला, सरकार आने के बाद उसी ने दबाया

वीडियो वाल टेंडर व अन्य टेंडरों के मामले विपक्ष में रहते हुए बीजेपी ने ही उठाए थे। इस मामले में प्रेस कांफ्रेंस तक की गई थी। लेकिन सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने अखिल अरोड़ा के खिलाफ कार्रवाई तो दूर उनकी 17 ए की जांच की अनुमति के प्रकरण को भी दबा लिया। यही नहीं 108 आईएएस अफसरों के तबादलों में भी अखिल अरोड़ा को नहीं बदला गया।नई सरकार के सबसे पॉवरफुल अफसरों में अब इनकी गिनती होने लगी है।

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विवेक कुमार जैन
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