28 किलो गांजा बरामदगी मामले स्वतंत्र गवाह के अभाव और विवेचना में खामी पर तीन आरोपी बरी

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा।

रेलवे स्टेशन पर 28 किलोग्राम अवैध गांजा बरामदगी के मामले में विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) माननीय राजीव कुमार पालीवाल की अदालत ने तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी करने के आदेश दिए हैं।

अदालत ने मामले में स्वतंत्र गवाह न होने और मुकदमे की विवेचना वादी से कनिष्ठ अधिकारी द्वारा कराए जाने को मुख्य आधार माना।

अभियोजन पक्ष का आरोप और घटना:

थाना जीआरपी आगरा कैंट में दर्ज मामले के अनुसार, वादी मुकदमा (तत्कालीन थानाध्यक्ष) विजय सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि 19 अगस्त 2019 को वह अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों के साथ आगरा कैंट स्टेशन पर गश्त और चेकिंग कर रहे थे।

इसी दौरान हाथों में बैग लिए तीन संदिग्ध व्यक्तियों को रोका गया। तलाशी लेने पर उनके बैग से कुल 28 किलोग्राम अवैध गांजा बरामद हुआ।

गिरफ्तारी और कार्रवाई:

पुलिस टीम ने मौके से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनकी पहचान योगेश पुत्र प्रेम सिंह (निवासी नगला सरदा, थाना सासनी, जिला हाथरस), अर्जुन सिंह पुत्र राम सिंह (निवासी नगला अदू, थाना हसायन, जिला हाथरस) और राजकुमार पुत्र किशन लाल (निवासी द्वारिकापुर, थाना सासनी, जिला हाथरस) के रूप में हुई।

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पुलिस ने तीनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 के तहत चालान कर उन्हें जेल भेज दिया था।

अदालत में सुनवाई और बचाव पक्ष के तर्क:

मामले के विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से केवल वादी मुकदमा विजय सिंह और हेड कांस्टेबल आलोक कुमार की ही गवाही दर्ज कराई जा सकी।

आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता भारत सिंह ने पैरवी की। उन्होंने अदालत के समक्ष तर्क प्रस्तुत किया कि इस पूरी जब्ती और गिरफ्तारी के दौरान किसी भी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया गया।

इसके अतिरिक्त, मुकदमे की विवेचना वादी अधिकारी से कनिष्ठ अधिकारी द्वारा कराई गई, जो विधिक प्रक्रिया के दृष्टिकोण से त्रुटिपूर्ण है।

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अदालत का फैसला:

विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) माननीय राजीव कुमार पालीवाल ने बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता के तर्कों को सुना और पत्रावली का अवलोकन किया।

स्वतंत्र गवाहों के अभाव और विवेचना प्रक्रिया में पाई गई विधिक खामी को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने अभियोजन पक्ष की कहानी को संदेहपूर्ण माना और साक्ष्य के अभाव में तीनों आरोपियों को बरी करने के आदेश पारित किए।

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विवेक कुमार जैन
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