आगरा।
दुकान मालकिन के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में जेल में बंद पूर्व नौकर को जिला जज की अदालत ने जमानत दे दी है।
अदालत ने वादिया (पीड़िता) द्वारा अपनी मेडिकल जांच कराने से इनकार करने और उसके बयानों में पाए गए विरोधाभासों को मुख्य आधार मानते हुए, आरोपी को 50,000/- रुपये के मुचलके पर रिहा करने का आदेश पारित किया।
अभियोजन की कहानी और आरोप:
शिकायत के अनुसार, आरोपी लोकेश कुमार (पुत्र कन्हैया लाल, निवासी नगला बेर, थाना जगदीशपुरा, जिला आगरा) वादिया के पति की हैंडलूम की दुकान पर नौकरी करता था। दुकान के काम के सिलसिले में उसका वादिया के घर भी आना-जाना लगा रहता था।
वादिया का आरोप था कि आरोपी ने किसी तरह उसका फोन नंबर प्राप्त कर लिया और उसे फोन करके परेशान करने लगा।
जब वादिया ने इस बात की शिकायत अपने पति से की, तो उन्होंने आरोपी लोकेश को नौकरी से हटा दिया।
नौकरी से निकाले जाने के बाद आरोपी ने वादिया के घर के आसपास चक्कर काटना शुरू कर दिया।

दर्ज कराई गई प्राथमिकी में निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए गए थे:
* 17 मई 2025 को वादिया के पति किसी काम से बाहर गए हुए थे, तभी आरोपी ने घर में घुसकर वादिया के साथ जबरन दुष्कर्म किया।
* इस घटना के बाद आरोपी ने वादिया को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।
* ब्लैकमेलिंग के जरिए आरोपी ने वादिया से नकदी और जेवरात ऐंठे तथा उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया।
* जब वादिया ने इसका विरोध किया, तो आरोपी ने उसके पति और बच्चों को जान से मारने की धमकी दी।
जमानत का आधार और अदालत का फैसला:
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताया। जिला जज ने पत्रावली और साक्ष्यों का गहराई से अवलोकन किया।
अदालत ने पाया कि वादिया ने इस गंभीर मामले में अपना मेडिकल परीक्षण कराने से इंकार कर दिया था, जो कि ऐसे मामलों में एक अहम साक्ष्य होता है।
इसके अतिरिक्त, वादिया द्वारा दिए गए बयानों में भी स्पष्ट विरोधाभास सामने आया। इन महत्वपूर्ण विधिक बिंदुओं पर विचार करते हुए, जिला जज ने आरोपी लोकेश कुमार का जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया और 50 हजार रुपये की जमानत राशि जमा करने पर उसकी रिहाई के आदेश दिए।
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