आगरा एमजी रोड पर स्थित मजार और दरगाह का विवाद न्यायालय पहुंचा, अधिकारियों को सम्मन जारी

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आगरा:

महानगर की लाइफलाइन कहे जाने वाले एमजी रोड पर बीच सड़क पर बनी मजार और दरगाह को हटाने का विवाद एक बार फिर गरमा गया है।

योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर अजय तोमर ने अधिवक्ता शिव आधार सिंह तोमर के माध्यम से इन धार्मिक संरचनाओं के ध्वस्तीकरण की मांग को लेकर अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में वाद दायर किया है।

न्यायाधीश माननीय श्वेत्शा चंद्रा की अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए अंगीकृत करते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर दिए हैं।

अधिकारियों से मांगा जवाब:

न्यायालय ने इस मामले में आगरा के जिलाधिकारी, नगर आयुक्त और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मुख्य अभियंता को सम्मन जारी करने के आदेश दिए हैं।

अदालत ने सभी विपक्षी पक्षों को 11 मई 2026 को स्वयं या अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाजिर होने का निर्देश दिया है।

यह कदम तब उठाया गया जब वादी पक्ष द्वारा पूर्व में दिए गए नोटिसों पर प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई।

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नोटिस के बाद भी कार्यवाही न होने पर लिया विधिक सहारा:

वादी कुंवर अजय तोमर के अनुसार, उन्होंने 19 जनवरी 2026 को धारा 80 सीपीसी के तहत आगरा प्रशासन और नगर निगम को विधिक नोटिस भेजकर यातायात में बाधक बनी इन संरचनाओं पर कार्यवाही की मांग की थी। नोटिस की अवधि बीत जाने के बाद भी जब अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया या कार्यवाही नहीं की, तो उन्होंने जनहित में न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

यातायात व्यवस्था और हादसों का हवाला:

अदालत में दायर वाद में तर्क दिया गया है कि ये मजार और दरगाह सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनी हैं, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

वादी का कहना है कि इन स्थलों के कारण अक्सर सड़क हादसे होते हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के उन आदेशों का भी हवाला दिया है, जिनमें सार्वजनिक स्थानों और सरकारी भूमि पर बने धार्मिक स्थलों को हटाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

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प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल:

कुंवर अजय तोमर ने अन्य जिलों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अवैध धार्मिक ढांचों पर कार्यवाही हो रही है, लेकिन आगरा में अधिकारी मौन साधे हुए हैं।

उन्होंने पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि जब समय-समय पर मंदिरों पर कार्यवाही की जाती है, तो अवैध मजारों को क्यों छोड़ा जा रहा है।

उन्होंने संकल्प दोहराया कि जब तक सरकारी जमीन से यह अतिक्रमण नहीं हट जाता, उनकी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।

इसके साथ ही उन्होंने शहर के अन्य हिस्सों में भी सरकारी जमीन पर बने ऐसे अवैध ढांचों को चिह्नित कर कार्यवाही कराने की बात कही है।

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विवेक कुमार जैन
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