सर्वोच्च न्यायालय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 8 अगस्त के फैसले के खिलाफ फैजाबाद बार एसोसिएशन की अपील पर कर रहा था सुनवाई
आगरा /नई दिल्ली 14 सितंबर ।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में इस वर्ष वकीलों की हड़तालों और जिला बार संघों द्वारा किए गए बहिष्कारों की संख्या पर डेटा प्रस्तुत करने को कहा। मामला फैजाबाद जिले में वकीलों की हड़ताल से जुड़ा था। हालांकि, आज कोर्ट ने कहा कि वह मामले का दायरा बढ़ाने के लिए इच्छुक है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुयान की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय से राज्य के सभी जिला न्यायाधीशों से रिपोर्ट मंगवाकर इन विवरणों को संकलित करने को कहा।
न्यायालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि अधिवक्ताओं को न्यायालय के अधिकारी होने के नाते आने वाली जिम्मेदारी की भावना को समझने की जरूरत है।
Also Read - हिंदी दिवस पर आई दिल प्रफुल्लित करने वाली खबरन्यायमूर्ति कांत ने टिप्पणी की,
“यह बहुत गंभीर मुद्दा है। हमारी पूरी न्यायिक प्रणाली पंगु हो गई है। गांवों से लोग दूर-दूर से आते हैं।”
न्यायालय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 8 अगस्त के फैसले के खिलाफ फैजाबाद बार एसोसिएशन की अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें एसोसिएशन के मामलों को संभालने, इसके कामकाज की देखरेख करने और दिसंबर 2024 तक इसके गवर्निंग काउंसिल के चुनाव कराने की गारंटी देने के लिए एल्डर्स कमेटी की स्थापना की गई थी।
इससे पहले इसने बार निकाय द्वारा वकीलों की लगातार हड़ताल के आह्वान पर कड़ी असहमति जताई थी। 4 सितंबर को सुनवाई के दौरान, शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की इस टिप्पणी पर गौर किया कि नवंबर 2023 से अप्रैल 2024 तक कुल 134 कार्य दिवसों में से फैजाबाद के वकील 66 दिनों तक काम से दूर रहे।
शीर्ष अदालत ने बार एसोसिएशन के प्रत्येक पदाधिकारी को एक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था, जिसमें कहा गया था कि वे भविष्य में न्यायिक कार्य से दूर रहने का कोई प्रस्ताव पारित नहीं करेंगे। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया।
मामले की आज की सुनवाई के दौरान, पीठ ने कहा कि
वह मामले के दायरे का विस्तार करना चाहती है ताकि यह मूल्यांकन किया जा सके कि उत्तर प्रदेश में सभी बार एसोसिएशन कैसे काम कर रही हैं ?
Also Read - चुनाव याचिका दायर करते समय वादी के प्राधिकारी के समक्ष उपस्थित न होने के कारण याचिका पोषणीय नहीं – इलाहाबाद हाईकोर्टइस प्रकार, उच्च न्यायालय को 2024 में अदालत के बहिष्कार के बारे में रिपोर्ट के माध्यम से सभी जिला न्यायाधीशों से विवरण संकलित करने के लिए कहा गया था।
इस मामले पर अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी, जिसमे पीठ कुछ अंतरिम निर्देश पारित कर सकती है।
वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश कुमार खन्ना और सुकुमार पट्टजोशी के साथ अधिवक्ता कुमार मुरलीधर, अतुल वर्मा, आदित्य पी खन्ना, आदर्श कुमार पांडे, मुकेश कुमार, वरुण चुघ, मिथिलेश कुमार जायसवाल, अरुण कण्वा, विग्नेश सिंह, अनूप कृष्ण उपाध्याय, अभिनव कौशिक, प्रशांत त्रिवेदी, आलोक कुमार, गौतम बरनवाल, शैलेंद्र पी सिंह और रोहित सिंह लोधी फैजाबाद बार एसोसिएशन की ओर से पेश हुए।
वरिष्ठ अधिवक्ता सीयू सिंह उच्च न्यायालय के समक्ष मूल रिट याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए और वर्तमान अपील का विरोध किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता और उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता के परमेश्वर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की ओर से पेश हुए।
[फैजाबाद बार एसोसिएशन बनाम बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश और अन्य]
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