आगरा:
विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावी क्षेत्र) माननीय विकास गोयल की अदालत ने लूट और माल बरामदगी के एक पुराने मामले में कड़ा रुख अपनाया है।
न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में दोनों आरोपियों को बरी करते हुए, गवाही से मुकरने पर वादी मुकदमा (शिकायतकर्ता) के विरुद्ध ही विधिक कार्यवाही करने के आदेश जारी किए हैं।
क्या था मामला ?
यह मामला थाना ताजगंज क्षेत्र का है। वादी बबलू कुशवाहा ने तहरीर दी थी कि 4 मई 2014 की रात करीब 7 बजे, जब वह कलाकृति चौराहे से अपने गाँव इटोरा जा रहा था, तब ताज व्यू तिराहे के पास मोटरसाइकिल सवार दो बदमाशों ने उसे धक्का देकर उसका कीमती मोबाइल लूट लिया था।
पुलिस ने तफ्तीश के दौरान विनोद (निवासी इरादत नगर) और अंकित (निवासी सेवला, सदर) को गिरफ्तार कर उनके पास से लूटा गया मोबाइल बरामद करने का दावा किया था और चार्जशीट दाखिल की थी।
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अदालत के फैसले का मुख्य आधार:
करीब 11 साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद, मामले में निम्नलिखित बिंदु महत्वपूर्ण रहे:
वादी का मुकरना: सुनवाई के दौरान वादी मुकदमा बबलू कुशवाहा अपने पूर्व के बयानों से पूरी तरह मुकर गया।
स्वतंत्र गवाह का अभाव: पुलिस द्वारा दिखाई गई मोबाइल बरामदगी की पुष्टि करने के लिए कोई भी अन्य स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था।
बचाव पक्ष के तर्क: आरोपियों के अधिवक्ता सोनवीर सिंह ने तर्क दिया कि जब शिकायतकर्ता स्वयं घटना से इंकार कर रहा है और बरामदगी संदिग्ध है, तो सजा का कोई आधार नहीं बनता।
न्यायालय का कड़ा संदेश:
न्यायाधीश माननीय विकास गोयल ने दोनों आरोपियों, विनोद और अंकित को दोषमुक्त करते हुए स्पष्ट किया कि अदालत का समय बर्बाद करने और झूठी गवाही देने के मामले में वादी को बख्शा नहीं जाएगा।
अदालत ने वादी बबलू कुशवाहा के विरुद्ध विधिक कार्यवाही (Prosecution for Perjury) शुरू करने का आदेश दिया है।
यह फैसला उन वादियों के लिए एक चेतावनी है जो पुलिस कार्यवाही के बाद न्यायालय में अपनी गवाही से पलट जाते हैं।
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