आगरा 25 अक्टूबर ।
आगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र गुप्ता धीरज के साथ मारपीट करने अपमानित करने तथा रुपए मांगने व जान से मारने की धमकी देने के आरोप में आगरा के जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अरुण श्रीवास्तव, डिप्टी सीएमओ डॉक्टर नंदन सिंह, महिला डॉक्टर भाग्यश्री तथा लिपिक मनीष निगम के विरुद्ध पुनरीक्षण वाद जिला जज माननीय विवेक संगल ने दर्ज कर आरोपी गणों को जवाब के लिए नोटिस भेजे हैं।
अधिवक्ता ने आगरा के सीजेएम माननीय अचल प्रताप सिंह की कोर्ट में उक्त चिकित्सा अधिकारियों के विरुद्ध आईपीसी के धारा 323, 504, 506, 500, 384 के अंतर्गत वाद दायर किया था ।
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जिसमें उन्होंने कथन किया था कि उक्त लोगों ने उनके साथ मारपीट की, अपमान किया व पुत्री गर्विता राज के मेडिकल करने के नाम पर रिश्वत में धनराशि की माँग की ।
लेकिन सीजेएम कोर्ट ने उक्त वाद दिनांक 3 अगस्त 24 को यह कह कर खारिज कर दिया था कि भ्रष्टाचार से संबंधित धाराओं में सीजेएम कोर्ट सुनवाई नहीं कर सकता ।
यह न्याय क्षेत्र उनके अधीन नहीं है । इसके बाद अधिवक्ता राजेंद्र गुप्ता ने सीजेएम के उक्त आदेश के विरुद्ध पुनरीक्षण याचिका जिला जज की कोर्ट में प्रस्तुत की है । जिस पर जिला न्यायालय ने आरोपी गणों को नोटिस भेजे हैं ।
अधिवक्ता ने अपने रिवीजन में कहा है कि इसी प्रकार के एक अन्य मामले में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की कुलपति आशुरानी तथा अन्य के विरुद्ध के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामले में दिनांक 12 सितंबर 2024 को धारा 156 (3) सीआरपीसी के तहत वीरेश कुमार द्वारा दायर मामले को सीजेएम आगरा ने अपने अपने यहां सुना और वाद दर्ज कर वादी के बयान दर्ज करने का आदेश किया है ।

लेकिन इन्हीं धाराओं में प्रस्तुत वाद अधिवक्ता जिसे अधिवक्ता राजेंद्र गुप्ता ने दाखिल किया था उसे सीजेएम आगरा द्वारा खारिज कर दिया गया था । जब कि दोनों मामले एक ही प्रकार की समान धाराओं में प्रस्तुत किए गए थे ।
अधिवक्ता द्वारा दाखिल पुनरीक्षण याचिका में जिला जज ने आगामी 21 नवंबर 2024 की तिथि सुनवाई के लिए नियत कर दी है और विपक्षियों को नोटिस जारी किए है ।
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