आगरा /प्रयागराज 25 अक्टूबर ।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ब्राह्मण समाज के खिलाफ आनलाइन अभद्र सामग्री पोस्ट करने के मामले में जौनपुर के एक वकील को राहत देते हुए उनके खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान तथा न्यायमूर्ति मोहम्मद अजहर हुसैन इदरीसी की खंडपीठ ने बरसातू राम सरोज दिया है।

याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई की तिथि 7 फरवरी नियत की है।
ज्ञात हो कि धारा 353 (2) बीएनएस में, धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा, जाति या समुदाय या किसी भी अन्य आधार पर, विभिन्न धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूहों या जातियों या समुदायों के बीच दुश्मनी, घृणा या दुर्भावना की भावना पैदा करने या बढ़ावा देने के इरादे से, या जिसके पैदा होने या बढ़ावा देने की संभावना है, इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों सहित, झूठी सूचना, अफवाह या भयावह समाचार युक्त कोई भी बयान या रिपोर्ट बनाने, प्रकाशित करने या प्रसारित करने के लिए दंड का प्रावधान है।
सुनवाई के दौरान यह दलील दी कि एफआईआर में यह नहीं बताया गया है कि याचिकाकर्ता ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर किस तरह की पोस्ट की है।
एफआईआर में उल्लेख किया गया है कि याचिकाकर्ता को बार एसोसिएशन से निकाल दिया गया था, जिससे साबित होता है कि एफआईआर दुर्भावनापूर्ण इरादे से दर्ज की गई थी।
याची पर आरोप लगाया गया है कि 25 सितंबर 2024 को उन्होंने अपने सोशल मीडिया आईडी पर ब्राह्मण समुदाय के बारे में ‘अभद्र’ टिप्पणी की, जिससे पूरे समुदाय को ठेस पहुंची।
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