आगरा:
पुलिस द्वारा आरोपी को हिरासत में लेने के समय में कथित हेरफेर करने का मामला अब अदालत की दहलीज पर पहुँच गया है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सिकंदरा थानाध्यक्ष को थाना परिसर में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों का 6 से 8 फरवरी तक का फुटेज सुरक्षित करने और उसे 6 अप्रैल को अदालत में पेश करने का कड़ा निर्देश दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि: क्या है आरोप ?
धोखाधड़ी के मामले में आरोपी यश खिरवार के अधिवक्ता ने अदालत में एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।
याचिका में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया कि:
* सिकंदरा पुलिस ने यश खिरवार को 6 फरवरी को ही बिना किसी ठोस कारण के हिरासत में ले लिया था और थाने ले आई थी।
* इसके विपरीत, पुलिस ने केस डायरी (Case Diary) में गिरफ्तारी का समय 7 फरवरी सुबह 10:40 बजे दर्शाया।

फुटेज बनेगा मुख्य साक्ष्य:
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत से गुहार लगाई कि पुलिस के इस ‘झूठ’ को बेनकाब करने के लिए थाना परिसर के सीसीटीवी फुटेज ही एकमात्र विश्वसनीय साक्ष्य हैं।
यदि इन फुटेज को सुरक्षित नहीं किया गया, तो पुलिस साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकती है या उन्हें मिटा सकती है।
अदालत का आदेश:
दोनों पक्षों को सुनने के बाद, सीजेएम माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव ने न्याय के हित में थाना सिकंदरा के सभी कैमरों की रिकॉर्डिंग को संरक्षित करने का आदेश दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि 6 फरवरी से 8 फरवरी के बीच की पूरी फुटेज सुरक्षित रखी जाए ताकि हिरासत के वास्तविक समय की पुष्टि हो सके।
इस आदेश से आगरा पुलिस महकमे में खलबली मच गई है, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर संवैधानिक अधिकारों और पुलिस की पारदर्शिता से जुड़ा है।
अब 6 अप्रैल को होने वाली सुनवाई में यह साफ होगा कि पुलिस की केस डायरी और सीसीटीवी फुटेज के समय में कितना अंतर है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य है।
समय में हेरफेर करना अक्सर इस संवैधानिक प्रावधान के उल्लंघन को छिपाने के लिए किया जाता है।
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