आगरा:
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (प्रथम), आगरा ने सेवा में कमी का एक गंभीर मामला पाते हुए ‘प्रिंस बैंड’ के संचालकों पर सख्त कार्रवाई की है।
आयोग ने बैंड मालिकों को आदेश दिया है कि वे न केवल बुकिंग की एडवांस राशि वापस करें, बल्कि पीड़ित उपभोक्ता को मानसिक पीड़ा और कानूनी खर्च के लिए हर्जाना भी भुगतें।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
नगला बूढ़ी, दयालबाग निवासी अधिवक्ता प्रदीप कुमार ने 28 नवंबर 2023 को अपनी शादी के लिए भोगीपुरा स्थित ‘प्रिंस बैंड’ को 25,000/- रुपये में बुक किया था, जिसके लिए 5,000/- रुपये एडवांस दिए गए थे।
शादी के दिन शाम 4 बजे बारात की निकासी के वक्त बैंड नहीं पहुंचा। फोन करने पर संचालकों ने झूठा आश्वासन दिया कि बैंड रास्ते में है।
रात करीब 11 बजे बैंड के प्रोपराइटर धांदू और बृजेश चौधरी ने पीड़ित से यह कहकर 20,000/- रुपये की बकाया राशि भी ले ली कि बैंड 10 मिनट में पहुंच रहा है।
इसके बावजूद बैंड नहीं आया, जिसके बाद पीड़ित को मजबूरी में आनन-फानन में दूसरा बैंड ‘श्री छत्तर बैंड’ 35,000/- रुपये देकर बुक करना पड़ा।
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आयोग का सख्त रुख:
परिवादी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और कॉल लॉग्स के आधार पर आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने पाया कि विपक्षीगण ने जानबूझकर सेवा में कमी की है।
विपक्षी पक्ष की ओर से कोई भी व्यक्ति अपना पक्ष रखने के लिए आयोग में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद यह फैसला एकपक्षीय रूप से सुनाया गया।
आयोग द्वारा सुनाया गया फैसला:
आयोग ने विपक्षीगण (धांदू उर्फ साबिर अली और बृजेश चौधरी) को निम्नलिखित भुगतान करने का आदेश दिया है:
* एडवांस राशि: 5,000 रुपये (6% वार्षिक ब्याज के साथ)।
* मानसिक पीड़ा हेतु क्षतिपूर्ति: 20,000/- रुपये।
* वाद व्यय (कानूनी खर्च): 5,000/- रुपये।
यदि निर्धारित 45 दिनों के भीतर इस राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो ब्याज की दर 6% से बढ़ाकर 9% वार्षिक कर दी जाएगी।
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