आगरा।
राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने हेतु पुलिस कमिश्नर आगरा को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा है।
पत्र में इस बात पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया गया है कि पुलिस थानों में अधिवक्ताओं को उचित सम्मान नहीं मिल रहा है, जबकि अधिवक्ता समाज न्याय प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है।
न्याय प्रक्रिया के पूरक हैं पुलिस और अधिवक्ता:
अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि अधिवक्ता समाज न केवल कानून का पालन करता है, बल्कि समाज में अत्यंत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।
उन्होंने ध्यान दिलाया कि स्वयं माननीय न्यायालय भी अपने निर्णयों में अधिवक्ताओं को ‘विद्वान अधिवक्ता’ कहकर संबोधित करते हैं।
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पत्र में स्पष्ट किया गया कि अधिवक्ता और पुलिस एक-दूसरे के पूरक हैं और न्याय व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए दोनों के बीच आपसी सम्मान अनिवार्य है।
थानों में ‘हेय दृष्टि’ से देखने पर जताई आपत्ति:
पत्र के माध्यम से पुलिस कमिश्नर को अवगत कराया गया कि जब कोई अधिवक्ता अपने वादकारी की पैरवी के लिए या उसके अनुनय-विनय पर थाने जाता है, तो अक्सर पुलिसकर्मी उन्हें सम्मान देने के बजाय ‘राह का रोड़ा’ मानते हैं।
अधिवक्ताओं के साथ किया जाने वाला अपमानजनक व्यवहार और उन्हें हेय दृष्टि से देखना न्याय और सामाजिक प्रक्रिया को कमजोर करता है। इसके विपरीत, जब कोई दरोगा या पुलिसकर्मी न्यायालय आता है, तो अधिवक्ता समाज उन्हें पूरा सम्मान प्रदान करता है।
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सम्मानजनक व्यवहार और समन्वय की मांग:
अध्यक्ष रमाशंकर शर्मा ने मांग की है कि पुलिस कमिश्नर सभी थानों को निर्देशित करें कि अधिवक्ताओं की बात को सम्मानपूर्वक सुना जाए।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि अधिवक्ता का कार्य नियमसंगत हो तो उसे किया जाए, और यदि गलत हो तो पुलिस उसे मानने के लिए बाध्य नहीं है, लेकिन व्यवहार मानवीय और गरिमापूर्ण होना चाहिए।
इससे पुलिस की ‘अधिवक्ता विरोधी’ छवि समाप्त होगी और व्यवस्था में एक नया आदर्श स्थापित हो सकेगा।
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