आगरा।
उत्तर प्रदेश रोडवेज के कर्मचारी द्वारा अपने ही साथी से उधार लिए गए आठ लाख रुपये वापस न करने और चेक बाउंस होने के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (षष्ठ) माननीय आतिफ सिद्दीकी ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी प्रमोद कुमार को साक्ष्यों के आधार पर अदालत में तलब करने के आदेश जारी किए हैं।
प्रकरण के अनुसार, न्यू जनता कॉलोनी, आगरा कैंट निवासी शिव नाथ सिंह ने विपक्षी प्रमोद कुमार, निवासी रोडवेज क्वार्टर, थाना रकाबगंज के खिलाफ परिवाद दायर किया था।
वादी शिव नाथ सिंह और आरोपी प्रमोद कुमार दोनों ही उत्तर प्रदेश रोडवेज में कार्यरत होने के कारण आपस में गहरे मित्र थे।

आपसी मित्रता और भरोसे के चलते वादी ने आरोपी की व्यक्तिगत आवश्यकता को देखते हुए 2 फरवरी 2025 को उसे आठ लाख रुपये उधार दिए थे।
उस समय प्रमोद कुमार ने छह माह के भीतर पूरी धनराशि वापस करने का वादा किया था।
नियत अवधि बीतने पर जब वादी ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी ने 5 अगस्त 2025 को आठ लाख रुपये का एक चेक वादी को सौंपा। जब वादी ने उक्त चेक को भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत किया, तो वह खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण अनादरित होकर वापस आ गया।
अदालत में सुनवाई के दौरान वादी के अधिवक्ता राजेश यादव ने दलीलें पेश कीं और चेक बाउंस होने से संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए।
न्यायालय ने अधिवक्ता के तर्कों और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का संज्ञान लेते हुए आरोपी प्रमोद कुमार को संबंधित धाराओं के तहत दोषी मानते हुए कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।
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