आगरा की सड़कों पर अवैध कब्जे के विरुद्ध उच्च न्यायालय का कड़ा रुख, पार्षद हेमंत प्रजापति ने अधिवक्ता शिवांगी सिंह के सहयोग से उठाई जनता की आवाज

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आगरा/प्रयागराज।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आगरा के लोहा मंडी जोन स्थित खातीपाड़ा क्षेत्र में सार्वजनिक मार्ग पर हुए अवैध अतिक्रमण को हटाने के मामले में अत्यंत गंभीर रुख अपनाया है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक संपत्तियां निजी जागीर नहीं हैं और प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि वह सड़कों को अवरोध मुक्त रखे।

न्यायालय का आदेश और प्रशासनिक हस्तक्षेप:

अधिवक्ता शिवांगी सिंह के माध्यम से दायर याचिका संख्या 18281/2026 (हेमंत कुमार प्रजापति बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य) पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने मामले में प्रभावी हस्तक्षेप किया।

न्यायालय ने दर्ज किया कि नगर निगम वार्ड संख्या 85 में अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए 13 मई 2026 की तिथि निर्धारित की गई थी।

पीठ ने पुलिस अधिकारियों से यह अपेक्षा की कि वे अतिक्रमण हटाने के अभियान में नगर निगम को पूर्ण और उचित सहायता प्रदान करें।

अतिक्रमण: सार्वजनिक पीड़ा और विधिक संघर्ष

याचिका में केवल निर्माण ढहाने की ही मांग नहीं की गई, बल्कि सार्वजनिक मार्गों की सुरक्षा के लिए बड़े नीतिगत प्रश्न भी उठाए गए हैं।सार्वजनिक सड़कों पर किसी भी प्रकार के स्थायी या अस्थायी अतिक्रमण को प्रतिबंधित करने की प्रार्थना की गई है।

कर्तव्यों के निर्वहन में विफल रहने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्यवाही की मांग की गई है। अधिवक्ता शिवांगी सिंह ने सुनवाई के दौरान दलील दी कि ये मार्ग विद्यार्थियों, रोगियों और वृद्धों जैसे सामान्य नागरिकों के सम्मानजनक जीवन का आधार हैं, जिन पर निजी कब्जा अवैध है।

प्रशासनिक ‘खानापूर्ति’ पर उठाए सवाल:

सुनवाई के दौरान यह चिंताजनक तथ्य भी सामने आया कि प्रशासन द्वारा की गई कार्यवाही महज एक औपचारिकता बनकर रह गई।

नगर आयुक्त को दिए गए प्रत्यावेदन के अनुसार, उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद मौके पर केवल एक फुट का हिस्सा तोड़कर इतिश्री कर ली गई।

मुख्य अवैध निर्माण अभी भी जस का तस बना हुआ है, जिससे स्थानीय निवासियों को संकरे मार्ग और निरंतर लगने वाले जाम से मुक्ति नहीं मिल पाई है।

नागरिक चेतना का प्रतीक:

आगरा की बेटी और अधिवक्ता शिवांगी सिंह द्वारा उठाया गया यह कदम शहर में एक ‘विधिक जागरण’ के रूप में देखा जा रहा है।

उन्होंने यह सिद्ध किया है कि जब प्रशासन निष्क्रिय हो जाए, तब एक सजग अधिवक्ता संविधान के माध्यम से आम नागरिक की पीड़ा को न्याय के सर्वोच्च गलियारों तक पहुँचा सकता है।

नगर निगम पार्षद हेमंत प्रजापति का पक्ष:

नगर निगम आगरा के वार्ड संख्या 85 (खातीपाडा)के पार्षद हेमंत कुमार प्रजापति ने सार्वजनिक मार्ग पर हुए अवैध बहुमंजिला निर्माण के विरुद्ध निर्णायक कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है।

पार्षद ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश (रिट पिटीशन संख्या 18281/2026) का तत्काल अनुपालन करने की मांग की है।

पार्षद हेमंत प्रजापति ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि लोहा मंडी जोन के अंतर्गत मोहल्ला पुल छिंगा मोदी में एक व्यक्ति द्वारा मुख्य मार्ग पर अवैध रूप से बहुमंजिला निर्माण कर अतिक्रमण किया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष (25 अप्रैल 2025) ही विपक्षी द्वारा अवैध निर्माण को स्वयं हटाने की लिखित अंडरटेकिंग दी गई थी, लेकिन नगर निगम के संबंधित अभियंताओं और कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण एक साल तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।

पार्षद ने बताया कि इस अवैध निर्माण के कारण मुख्य मार्ग की चौड़ाई कम हो गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में भयंकर जाम की स्थिति बनी रहती है।

उन्होंने कहा,

“मैंने बार-बार विभाग को सूचित किया, लेकिन जब अधिकारियों के कान पर जूं नहीं रेंगी, तब मुझे जनता के हित में माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।”

माननीय उच्च न्यायालय ने इस प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाते हुए 11 मई 2026 को आदेश पारित किए हैं। पार्षद ने स्पष्ट किया कि आगामी 15 मई को न्यायालय में इस मामले की पुनः सुनवाई है।

उन्होंने नगर आयुक्त से मांग की है कि आज ही ध्वस्तीकरण की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, अन्यथा वह न्यायालय को अवगत कराएंगे कि विभाग जानबूझकर आदेशों की अवहेलना कर रहा है।

हेमंत प्रजापति ने अंत में कहा कि वह पार्षद के रूप में जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और सार्वजनिक सड़क पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तत्काल कार्यवाही नहीं हुई, तो वह इस मामले को शासन स्तर तक ले जाएंगे।

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विवेक कुमार जैन
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