आगरा/नई दिल्ली:
आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह को उत्तर प्रदेश सरकार के स्कूलों को बंद करने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उनकी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एजी मसीह की पीठ ने संजय सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलें सुनीं।
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याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार के 16 जून के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कम नामांकन के आधार पर 105 प्राथमिक स्कूलों को बंद करने और उन्हें दूसरे स्कूलों में विलय करने का फैसला लिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश:
* न्यायालय ने संजय सिंह से याचिका वापस लेने और इलाहाबाद उच्च न्यायालय जाने को कहा।
* न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि वह इस मामले की शीघ्र सुनवाई करे और निर्णय ले, क्योंकि यह हजारों छात्रों के अधिकारों और हितों से जुड़ा है।
याचिका के मुख्य आरोप:
याचिका में कहा गया था कि स्कूलों को बंद करने का यह फैसला शैक्षणिक वर्ष के बीच में लिया गया है, जिससे छात्रों, विशेष रूप से वंचित पृष्ठभूमि के बच्चों, जिनमें लड़कियाँ, विकलांग और अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चे शामिल हैं, पर बुरा असर पड़ेगा।
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इसमें यह भी आरोप लगाया गया था कि इस फैसले से स्कूलों में भीड़भाड़ बढ़ेगी, बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर बढ़ेगी और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ भी पैदा होंगी।अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, संजय सिंह को इस मामले में न्याय के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रुख करना होगा।
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