आगरा:
जूता कारोबार से जुड़े एक चेक बाउंस के मामले में आगरा के न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम) माननीय दीक्षा भारती की अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।
न्यायालय ने महाराष्ट्र के अकोला निवासी आरोपी सुमित खनेजा के खिलाफ पर्याप्त आधार पाते हुए उन्हें विचारण (Trial) के लिए अदालत में तलब करने के आदेश जारी किए हैं।
व्यापारिक लेनदेन और उधार का मामला:
यह मामला शास्त्रीपुरम स्थित ‘एक्सपोर्ट पार्क’ की फर्म मेसर्स एवरी शूज से जुड़ा है।
फर्म के प्रोपराइटर और वादी मनोज सरीन ने अपने अधिवक्ता अनिल अग्रवाल के माध्यम से अदालत में परिवाद (Complaint) दायर किया था।
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मामले के मुख्य बिंदु:
* व्यापारिक संबंध: वादी मनोज सरीन और विपक्षी सुमित खनेजा के बीच लंबे समय से व्यापारिक संबंध थे। विपक्षी सुमित खनेजा वादी की फर्म से जूते खरीदने का काम करते थे।
* उधार की अदायगी: व्यापार के दौरान हुए उधार के भुगतान के लिए जब वादी ने तगादा किया, तो विपक्षी ने बकाया राशि चुकाने के लिए एक चेक जारी किया था।
* चेक डिसऑनर: जब वादी ने उक्त चेक को भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत किया, तो वह ‘डिसऑनर’ (बाउंस) हो गया। इसके बाद कानूनी नोटिस दिए जाने के बावजूद आरोपी ने भुगतान नहीं किया।
न्यायालय का आदेश:
सुनवाई के दौरान वादी के अधिवक्ता अनिल अग्रवाल ने दलील दी कि चेक कानूनी देनदारी के बदले जारी किया गया था और इसका अनादर होना N.I. Act की धारा 138 के तहत अपराध है।
अधिवक्ता के तर्कों और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का संज्ञान लेते हुए, न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम) माननीय दीक्षा भारती ने विपक्षी सुमित खनेजा को मामले के विचारण हेतु अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए आदेशित किया है।
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