आगरा, ९ जुलाई ।
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर उर्फ देवकीनंदन शर्मा के खिलाफ दायर महाराज जयचंद मानहानि केस (परिवाद संख्या- 643/2025, अजय प्रताप सिंह, एडवोकेट बनाम देवकीनंदन शर्मा) की सुनवाई आज आगरा के एसीजेएम-10 माननीय मोहम्मद साज़िद के न्यायालय में हुई।
वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि इस मामले में अभियुक्त देवकीनंदन ठाकुर की ओर से उनके अधिवक्ता अनुराग शुक्ला अदालत में हाजिर हुए। शुक्ला ने जवाब दाखिल करने के लिए परिवाद की छाया प्रति मांगी, जिसे उन्हें सौंप दिया गया।
अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि यह परिवाद भारतीय न्याय संहिता की धारा 356(2) के तहत आपराधिक मानहानि का है। उन्होंने बताया कि कथावाचक ने वाराणसी में एक कथा के दौरान कथित तौर पर कहा था कि “आज सनातन धर्म को खतरा जयचंदों से है, जयचंदों के कारण पाकिस्तान बना व कश्मीरी ब्राह्मणों का नरसंहार जयचंदों के कारण हुआ।”
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वादी अधिवक्ता ने तर्क दिया कि महाराज जयचंद राष्ट्रकूट वंश की राठौड़ शाखा के क्षत्रिय थे और वादी स्वयं भी क्षत्रिय कुल से हैं। उन्होंने कहा कि कथावाचक के इन बयानों से उन्हें मानसिक आघात और पीड़ा हुई।
इसके अलावा, कई लोगों ने सार्वजनिक रूप से इन बयानों के बाद कहा कि क्षत्रियों के कारण भारत का विभाजन हुआ और क्षत्रियों के कारण ही कश्मीरी ब्राह्मणों का नरसंहार हुआ, जिससे वादी अधिवक्ता की मानहानि हुई।
न्यायालय ने देवकीनंदन ठाकुर को अपना जवाब दाखिल करने के लिए सुनवाई की अगली तारीख 18 अगस्त निर्धारित की है।
आज की सुनवाई के दौरान वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह के साथ अधिवक्ता नरेश सिकरवार, एस पी सिंह सिकरवार, राहुल सोलंकी और अनुराग शुक्ला अदालत में उपस्थित रहे।
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